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Wednesday, September 21, 2011

हमें देख कर मुस्कारायेंगे

ना नज़रें मिलाते
ना देख कर मुस्कराते
निरंतर
चेहरा अपना छुपाते
खामोशी से निकल जाते
निरंतर सवालों के
घेरे में छोड़ जाते
उनकी बेरुखी
हम समझ ना सके 
इतने खुदगर्ज़ होंगे
ये भी ना मानते
उनकी भी होगी
कोई मजबूरी
हमें यकीन खुदा पर
इक दिन ये फासला
कम होगा
पाक रिश्तों के
दामन पर
कोई दाग ना होगा
वो चेहरा फिर से
दिखाएँगे
हमें देख कर
मुस्कारायेंगे
21-09-2011
1537-108-09-11

Friday, July 29, 2011

उम्मीदों का दामन तार तार हो गया

उम्मीदों का दामन

तार तार हो गया

नाकामयाबी के छेदों से

भर गया

अब क्या रफू करेगा कोई ?

क्या दिलासा देगा कोई ?

कोई मिल भी जाए

क्या साथ निभाएगा कोई ?

यादों की चादर ओढ़े हूँ

उम्मीदें उस में

छुपा कर रखता हूँ

एक पैबंद लग भी जाए

दामन ठीक हो नहीं

सकता

अब उम्मीद करना

छोड़ दिया

क्यों उम्मीदें बर्बाद करूँ ?

अब चुपचाप रहता हूँ

निरंतर खून के घूँट

पीता हूँ

29-07-2011

1261-145 -07-11

उनसे मिलना क्या हुआ

उनसे

मिलना क्या हुआ

तन्हा

दामन उजाले से

भर गया

चाहत की हवा बहने

लगी

मोहब्बत के फूल

खिलने लगे

जहन ख्यालों से

महकने लगा

निरंतर उदास चेहरा

मुस्कारने लगा

दिल अब खुद का

ना रहा

उनकी मोहब्बत में

गिरफ्तार हो गया

29-07-2011

1260-144 -07-11