निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
Wednesday, September 21, 2011
हमें देख कर मुस्कारायेंगे
Friday, July 29, 2011
उम्मीदों का दामन तार तार हो गया
उम्मीदों का दामन
तार तार हो गया
नाकामयाबी के छेदों से
भर गया
अब क्या रफू करेगा कोई ?
क्या दिलासा देगा कोई ?
कोई मिल भी जाए
क्या साथ निभाएगा कोई ?
यादों की चादर ओढ़े हूँ
उम्मीदें उस में
छुपा कर रखता हूँ
एक पैबंद लग भी जाए
दामन ठीक हो नहीं
सकता
अब उम्मीद करना
छोड़ दिया
क्यों उम्मीदें बर्बाद करूँ ?
अब चुपचाप रहता हूँ
निरंतर खून के घूँट
पीता हूँ
29-07-2011
1261-145 -07-11
उनसे मिलना क्या हुआ
मिलना क्या हुआ
तन्हा
दामन उजाले से
भर गया
चाहत की हवा बहने
लगी
मोहब्बत के फूल
खिलने लगे
जहन ख्यालों से
महकने लगा
निरंतर उदास चेहरा
मुस्कारने लगा
दिल अब खुद का
ना रहा
उनकी मोहब्बत में
गिरफ्तार हो गया
29-07-2011
1260-144 -07-11