Showing posts with label रूप. Show all posts
Showing posts with label रूप. Show all posts

Wednesday, March 30, 2011

वो प्रक्रति के करीब हैं,फूल उन्हें पसंद है


वो प्रक्रति के करीब हैं,
फूल उन्हें पसंद है
कचनार,अमलतास,
पलाश,गुलमोहर,
के रंग उन्हें भाते
चमेली,मोगरा,
गुलाब,चम्पा,
महक से लुभाते,
कमल,ऑर्किड,
डेहलिया,गुलदाऊदी
के रूप उन्हें  मोहते,
निरंतर फूल
वो बालों में लगाते
निरंतर महकते,
रंग,रूप से मोहते
अपने
अंदाज़ से लुभाते
खुद किसी फूल से
कम ना लगते
इस लिए दिल से
भाते
30-03-03
557—227-03-11

Thursday, March 24, 2011

गिला खुदा से नहीं ,जो रूप परी का और चेहरा चाँद सा तुम्हें दिया


 
गिला खुदा से नहीं
जो रूप परी का 
और चेहरा चाँद सा
तुम्हें दिया
शिकायत है
तुम्हें कहीं और  
बसाया
गर जो घर तुम्हारा
मेरे घर के सामने होता
उगते ही
तुम्हारी चांदनी में
 नाहता
निरंतर उजाले में रहता
अन्धेरा क्या होता
कभी पता ना पड़ता
सामने तुम्हारे घर के
ज़िन्दगी काटता
24-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
493—163-03-11