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Wednesday, May 11, 2011

मौत के क्रंदन के बाद,हंसने का अवसर मिला

गरज
गरज कर बरसे बादल
पानी की बौछार करी
धूप को चीरा बूंदों ने
इन्द्रधनुष की छटा बिखेरी
वृक्षों को नहलाया जम कर
प्यासी धरती की प्यास
बुझाई
बालक, बूढ़े वर्षा में
नहाए
किसानों के चेहरे खिले
बीज खेतों में रोपेंगे
फसल नयी लगायेंगे
भूखे पेट आशा से भरे
नदी,तालाब जीवित हुए
निरंतर उदास चेहरे
खुशी से मतवाले हुए
हवा के ठन्डे झोंके चले
मोर नृत्य में मस्त हुए
पक्षी कलरव करने लगे
प्रतीत हो रहा मानो
मरघट फूलों से महका
मौत के क्रंदन के बाद
हंसने का अवसर मिला
11-05-2011
835-42-05-11

Wednesday, March 30, 2011

वो प्रक्रति के करीब हैं,फूल उन्हें पसंद है


वो प्रक्रति के करीब हैं,
फूल उन्हें पसंद है
कचनार,अमलतास,
पलाश,गुलमोहर,
के रंग उन्हें भाते
चमेली,मोगरा,
गुलाब,चम्पा,
महक से लुभाते,
कमल,ऑर्किड,
डेहलिया,गुलदाऊदी
के रूप उन्हें  मोहते,
निरंतर फूल
वो बालों में लगाते
निरंतर महकते,
रंग,रूप से मोहते
अपने
अंदाज़ से लुभाते
खुद किसी फूल से
कम ना लगते
इस लिए दिल से
भाते
30-03-03
557—227-03-11