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Saturday, July 30, 2011

आज तुम से ही पूंछ लूं

आज तुम से ही

पूंछ लूं

सत्य कह कर

नाराज़ करूँ

या झूठ बोल कर,

खुश करूँ ?

निरंतर सवालों में

जकड़ा हूँ

अहम् बढ़ाऊँ

या कम करूँ ?

सच्चा मित्र

बन कर रहूँ

या दिखावा करूँ ?

सब जीते जैसे

मैं भी वैसे ही जीऊँ ?

30-07-2011

1268-152-07-11

Wednesday, March 30, 2011

दिल करे तो जवाब दे दें ,नहीं तो सपने में आ कर बता दें


क्यूं ख़त का 
जवाब उन्होंने अब तक
दिया नहीं
या तो ख़त मिला नहीं
या मतलब समझा नहीं
या तो नाराज़ हो गए
शक से देखने लगे
या फिर वक़्त मिला नहीं
 निरंतर क्यां लिखूं ?
क्या ना लिखूं ?
के चक्कर में फँस गए
या कैसे लिखूं
के सोच में पड़ गए
कौन उन्हें समझाए

दिल करे तो जवाब
दे दें
नहीं तो सपने में
आ कर बता दें
30-03-03
554—224-03-11