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Thursday, July 7, 2011

कोशिश करना नहीं छोड़ता

पेड़ों में पत्ते तो हैं
पर फूल नहीं खिलते
पक्षी अब
घोंसला नहीं बनाते
मैं फिर भी पानी देता हूँ
पक्षियों के लिए दाना
डालता हूँ
किसी पक्षी की नज़र
पड़ जाए
बसेरा पेड़ पर बसा ले
पूरी कोशिश करता हूँ
निरंतर नया घोंसला
तलाश करता हूँ
कहीं कोई फूल खिला हो
पेड़ को नज़रों से
छानता हूँ
हताश तो होता हूँ
निराश नहीं होता
हरयाली देख कर
खुश हो लेता  हूँ
संतुष्ट रहता हूँ
पर कोशिश करना
नहीं छोड़ता
07-07-2011
1148-32-07-11

Monday, March 28, 2011

सफलता का नुस्खा



हताश, निराश, व्यथित
अवसाद में जी रहा था
सफलता का स्वाद
कभी ना चख सका
सोचने लगा
जीने का अर्थ ना था
जान देने का इरादा किया
नदी की और चल पडा
नदी में कूदने के लिए
पुल पर जाने लगा
एक आवाज़ ने रोक लिया
बिना हाथ पैरों वाला
एक शख्श उससे
दस रूपये मांग रहा था
वो रुका,
उसने उसे भिखारी समझा
सोचा मरने से पहले
उसकी मदद कर दूं
कुछ दुआ उस की ले लूं
सौ रूपये का नोट उसे दिया
उसने लौटा दिया
बोला भिखारी नहीं हूँ
पुल का चौकीदार हूँ
पुल का टैक्स वसूलता हूँ
निरंतर मेहनत और जज्बे से
जीवन यापन करता हूँ  
कैंसर से पीड़ित हूँ
हिम्मत नहीं हारता हूँ
बात समझ में आ गयी 
उसने इरादा बदला,
फिर से काम में जुट गया
उसे सफलता का नुस्खा
मिल गया
28-03-03
533—203-03-11