निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
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Thursday, June 7, 2012
Thursday, January 12, 2012
पर्दाफ़ाश
हम कर रहे थे
इंतज़ार उनका
वो देख कर भी
अनदेखा कर रहे थे
निरंतर
छुपने की कोशिश में
परेशाँ हो रहे थे
उन्हें पता नहीं था
उनकी महक ने हमें
उनकी मौजूदगी के
बारे में बता दिया था
उनकी कोशिश का
पर्दाफ़ाश
कर दिया था
12-01-2012
36-36-01-12
Tuesday, November 8, 2011
उसकी महक से पता चला
उसकी महक से
पता चला
दूर कहीं फूल खिला
दिल हमारा मचल पडा
उस से मिलने की
ख्वाइश का सिलसिला
चल पडा
अब हर रात खामोश
हर दिन उदास था
ख्याल जहन में सिर्फ
उससे मिलने का था
निरंतर मुस्काराता चेहरा
अब बेहाल था
दिल का तडपना
मजबूरी था
08-11-2011
1756-24-11-11
Monday, August 8, 2011
गुजरा वक़्त एक महकता गुलशन
एक महकता गुलशन
अनगिनत
सुन्दर फूलों से भरा
आँखों को आराम
दिल को सुकून देता
जी निरंतर चाहता
गुलशन में बैठा रहूँ
फूलों की महक ज़ज्ब
करता रहूँ
आज से दूर भाग जाऊं
बदले वक़्त की कडवी
हकीकत को भूल जाऊं
इसी तरह खुद को
खुश रखूँ
08-08-2011
1319-41-08-11
Wednesday, March 30, 2011
Saturday, March 26, 2011
फूल जहां भी खिलता,हमेशा महकता
फूल
जहां भी खिलता
हमेशा महकता
निरंतर दिल को लुभाता
दूर से ही अहसास
खुशबू का कराता
आनंद हर शख्श को देता
भेद भाव कभी ना करता
जात,पांत,रंग,मजहब से
दूर खुद को रखता
सन्देश भाई चारे को देता
हर इंसान को बराबर
समझता
जो भी प्यार से लगाए
उस के बगीचे में
खिलता
26-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
510—180-03-11
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