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Thursday, June 7, 2012

आज से पहले


आज से पहले
रात की रानी
कभी इतना
नहीं महकी थी
आज
क्या ख़ास हुआ
जानने के लिए
जब किसी से पूछा
तो मालूम हुआ
वो कुछ
वक़्त के लिए
उसके पास
रुकी थी
06-06-2012
577-27-06-12

Thursday, January 12, 2012

पर्दाफ़ाश

हम कर रहे थे
इंतज़ार उनका
वो देख कर भी
अनदेखा कर रहे थे
निरंतर
छुपने की कोशिश में
परेशाँ हो रहे थे
उन्हें पता नहीं था
उनकी महक ने हमें
उनकी मौजूदगी के
बारे में बता दिया था
उनकी कोशिश का
पर्दाफ़ाश
कर दिया था

12-01-2012
36-36-01-12

Tuesday, November 8, 2011

उसकी महक से पता चला


उसकी महक से
पता चला
दूर कहीं फूल खिला
दिल हमारा मचल पडा
उस से मिलने की
ख्वाइश का सिलसिला
चल पडा
अब हर रात खामोश 
हर दिन उदास था
ख्याल जहन में सिर्फ
उससे मिलने का था
निरंतर मुस्काराता चेहरा
अब बेहाल था
दिल का तडपना
मजबूरी था  
08-11-2011
1756-24-11-11

Monday, August 8, 2011

गुजरा वक़्त एक महकता गुलशन

गुजरा वक़्त

एक महकता गुलशन

अनगिनत

सुन्दर फूलों से भरा

आँखों को आराम

दिल को सुकून देता

जी निरंतर चाहता

गुलशन में बैठा रहूँ

फूलों की महक ज़ज्ब

करता रहूँ

आज से दूर भाग जाऊं

बदले वक़्त की कडवी

हकीकत को भूल जाऊं

इसी तरह खुद को

खुश रखूँ
08-08-2011

1319-41-08-11

Wednesday, March 30, 2011

प्यार से जीना चाहता



फाख्ता 
सा उड़ना चाहता
आकाश में खोना
चाहता
हरे भरे पेड़ पर
घोंसला बनाना चाहता
मीठे फल खाना चाहता
मिठास उनकी बांटना
चाहता
फूलों के बीच रहना
चाहता
उन सा महकना
चाहता
जोड़े से रहना चाहता
निरंतर प्यार से
जीना चाहता
30-03-03
553—223-03-11

Saturday, March 26, 2011

फूल जहां भी खिलता,हमेशा महकता



फूल 
जहां भी खिलता
हमेशा महकता
निरंतर दिल को लुभाता
दूर से ही अहसास
खुशबू का कराता
आनंद हर शख्श को देता
भेद भाव कभी ना करता
जात,पांत,रंग,मजहब से
दूर खुद को रखता
सन्देश भाई चारे को देता
हर इंसान को बराबर
समझता
जो भी प्यार से लगाए
उस के बगीचे में
खिलता
26-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
510—180-03-11