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Sunday, March 17, 2013

हाथों की लकीरों को देखता हूँ



हाथों की
लकीरों को देखता हूँ
सोचने लगता हूँ
भाग्य की प्रतीक्षा करूँ
या कर्म से भाग्य बनाऊँ
हाथों की ताकत को
काम में लूं
पर जानता हूँ
बिना कर्म भाग्य भी
साथ नहीं देता
हिम्मत और विवेक हो तो
भाग्य स्वयं बन जाता
सफलता को
कदम चूमने के लिए
बाध्य कर देता
भाग्य पर अत्यधिक
विश्वास रखने के लिए
स्वयं से क्षमा माँगता हूँ
कर्म में जुट जाता हूँ
30-30-15-01-2013
भाग्य,किस्मत,कर्म,विवेक
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Wednesday, November 28, 2012

इच्छाओं आकांशाओं और यथार्थ के पुल



मेरी
इच्छाओं और यथार्थ के
बीच के सभी पुल ढहते
जा रहे हैं
जैसे किसी फलदार
पेड़ से कच्चे फल
बिन पके ही गिरते
जा रहे हैं
मेरी आकांशाओं के
आसमान धूल धूसरित
होते जा रहे हैं
अब सोचने लगा हूँ
इच्छाओं आकांशाओं के
समुद्र से निकल जाऊं
यथार्थ के रेगिस्तान में
चैन ढूंढ लूं
परमात्मा की हाथों में
स्वयं को सौंप दूं
केवल कर्म में
विश्वास रखूँ
867-51-28-11-2012
आकांशाओं,इच्छाओं,यथार्थ,कर्म

Thursday, July 5, 2012

खामोश रहो



खामोश रहो
कुछ मत बोलो
अपने गम अपने तक
रख लो
ना विरोध करो ना
प्रतिरोध करो
कोई कुछ कहे
चुपचाप सुन लो
ना व्यथित हो
ना आंसू बहाओ
पहले भी
तुमने विरोध किया
क्या नतीजा निकला ?
क्या सिला मिला ? 
बचा खुचा विश्वास खोया
खुद को चौराहे पर
खडा पाया
किधर जाना है?
पता नहीं था
क्यों भूल गए?
बहुत मुश्किल से खुद को
सम्हाला था
क्या बार बार ऐसा ही
चाहते हो
कब तक लड़ोगे
लोगों को बदलने की
कोशिश करोगे
बार बार हारोगे
खुद के अस्तित्व को
खतरे में डालोगे
क्यों ना समर्पण कर दो?
सबकी इच्छा का पालन
कर लो
 नाराजगी दूर कर दो
प्रभु में विश्वास रखते हो
तो उस पर छोड़ दो
वो जैसा चाहता है
वैसा ही होगा
लड़ोगे तो भी
नहीं लड़ोगे तो भी
तुम कर्म करते रहो
ईमान से जीते रहो
सब्र से सहते रहो
अब समय आ गया है
भाग्य पर छोड़ दो
जो भाग्य में लिखा है
हो जाएगा
नहीं चाहोगे तो भी
चाहोगे तो भी
05-07-2012
604-01-07-12

Saturday, February 25, 2012

जिस पौधे में कलियाँ ना खिले वो किसे भाता ?

जिस पौधे में
कलियाँ ना खिले
वो किसे भाता ?
जो कली फूल बन कर
ना खिले
उसे कौन चाहता ?
जो फूल
रूप से नहीं लुभाए
वो किसे अच्छा लगता ?
अपनी महक से
मदमस्त ना करें
उसे कौन याद रखता?
जो मनुष्य
मधुर व्यवहार ना करे
वो किसे भाता ?
जो अपने कर्मों की
महक
जग में ना फैलाए
उसे कौन याद रखता?
25-02-2012
243-154-02-12

Saturday, February 11, 2012

चाहे मंदिर जाओ या मस्जिद जाओ


ना कर्मों की  
सज़ा होती
ना ही कोई  
पुरस्कार होता
केवल परिणाम
होता
सपनों की दुनिया से
बाहर आ जाओ
पुरस्कार की चाहत में
कुछ ना करो
केवल
परिणाम से डरो
चाहे मंदिर जाओ या
मस्जिद जाओ
कुछ फर्क नहीं पड़ता
बस इतना से जान लो
इश्वर से
कुछ नहीं छुपता 
बस वैसा ही करो
जैसा उसको अच्छा
लगता
11-02-2012
152-63-02-12

Wednesday, September 14, 2011

संतुष्टी जीवन का मूल मन्त्र

मूल मन्त्र 
इच्छाएँ रखना भी
आवश्यक 
नियंत्रण उन पर
अत्यावश्यक
बिना कर्म के कुछ नहीं
मिलता
सफलता मिलना
निश्चित ना होता
हिम्मत फिर भी नहीं
हारना 
म्रदु व्यवहार सबको
भाता
अभिमान मनुष्य का
नाश करता
क्रोध जीवन को
भस्म करता
स्वार्थ सुख नाशक
होता
दुखों को बुलावा देता  
दिनचर्या के नियम
बनाओ
व्यवहार में अपने
संयम लाओ
होड़ अपने से दूर
भगाओ 
 सदाचार से जीना सीखो
धन बिना काम नहीं
चलता
भविष्य का भी ध्यान करो
आवश्यकतानुसार
संचय करो
येन केन प्रकारेण
ना संचय करो
निरंतर इश्वर का
नमन करो
छोटों को प्यार
बड़ो का सम्मान
करो
खुल कर हंसा करो
कम से कम रोया करो
समय सदा
इकसार नहीं रहता
ये बात भी जान लो
  दर्द जीवन में आयेंगे
दर्द सहना सीख लो
14-09-2011
1502-74-09-11

मनुष्य कर्मों से जाना जाता

 सूर्य धरती को
चकाचोंध करता
ऊर्जा से जीवों को
जीवित रखता
अस्त होने पर
अस्तित्व का प्रतीक
भी नहीं छोड़ता
सूर्य का प्रताप सदैव
याद रहता
निरंतर उसे पूजा जाता
क्यों मनुष्य
सूर्य से नहीं सीखता ?
निरंतर नाम के लिए जीता
मन में इच्छाएँ संजोता
येन केन प्रकारेण
नाम की चाहत में जीता
किसी तरह
उसकी म्रत्यु के बाद
लोग उसे याद करते रहे
उसे पूजते रहे
निरंतर मनोइच्छा की
उथल पुथल में
भूल जाता
मनुष्य कर्मों से
जाना जाता
कर्मों से विमुख को
कोई याद नहीं करता
13-09-2011
1501-73-09-11

Thursday, September 8, 2011

पलाश का पेड़

केसरिया
रंग के फूलों से लदा
जंगल में
आग का आभास  देता
हरे पेड़ों के बीच
जंगल का राजा
दिखता
माली, ना उसके
फूलों को तोड़ता
ना माला में पिरोता
ना मंदिर में कोई
चढ़ाता
पलाश अपने में मस्त
उसे नहीं
दुःख  इस बात का
हर्षोल्लास
से जीता रहता
केसरिया रंग फूलों का
जिस पर भी चढ़ता
आसानी से नहीं उतरता
निरंतर छाप अपनी
छोड़ता
सन्देश दुनिया को देता
जहां भी रहो
पहचान अपनी बनाओ
कर्मों से जाने जाओ
08-09-2011
1465-37-09-11