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Wednesday, March 27, 2013

इस बार की होली



इस बार की होली 
यादगार बन जाए 
बिछड़ों को मिलाये
मन के रंज मिटाए  
दुसमन दोस्त बन जाए
इच्छाएं पूरी हो जाएँ 
जीवन में रंग भर जाए 
चेहरे खुशी से दमक जाएँ 
इस बार की होली 
जीवन भर याद आये
52-52-27-01-2013
होली, यादगार
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

हम भूल गए


हम भूल गए होली पर

गली मोहल्ले नाचना गाना
,
चंग बजाना  हँसना हँसाना

प्रेम भाईचारे से मिलना जुलना
,
रंग गुलाल से होली खेलना

गिले शिकवे दूर करना

याद रह गया केवल ई मेल.

एस एम एस भेजना
51-51-27-01-2013
होली ,ई मेल, एस एम एस,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Friday, November 16, 2012

चिंगारी



एक चिंगारी
फूस की झोंपड़ी
पर आ गिरी
क्षणों में
झोपडी जल कर
राख हो गयी
वो घर से
बेघर हो गयी
उसके घर की
होली जली
लोगों की
दीपावली मनी
844-28-16-11-2012
चिंगारी ,होली,दीपावली

Tuesday, March 20, 2012

होली पर कविता -हर बरस आती होली


हर बरस आती होली
बस्ती बस्ती घूमती
मस्तों की टोली
लिए हाथ में चंग
बजाते ढोलक और डफली
चलाते रंग भरी पिचकारी
खूब होता नाच गाना
होती हँसी ठिठोली
ऋतू बसंत में
उड़ता अबीर गुलाल
हो जाती सुबह गुलाबी
हर ह्रदय में सजती प्रेम
उमंग की होली
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई
बच्चे बूढ़े और जवान
मनाते मिल कर होली
हर बरस आती होली
20-03-2012
414-148-03-12


Saturday, March 10, 2012

हास्य कविता-मित्र बोला हँसमुखजी से खूब मनाई तुमने होली

मित्र
बोला हँसमुखजी से
खूब मनाई तुमने होली
कृष्ण बन कर
की भरपूर मस्ती
खूब किया
नैन मटक्का राधा से
चढ़ाई भांग
लगाया रंग राधा के
राधा भी ना शरमाई 
ना घबरायी तुमसे
लगी समझने तुमको
कन्हैया
हँसमुखजी ने अचम्भे से
आँखें मटकायी
कहने लगे हाय हाय
मुझसे भारी भूल हो गयी
अब दिल ना दुखाओ
ना ही सुनाओ
किस्से मस्त होली के
ना दिखी राधा मुझको
ना दिखी पिचकारी 
ना जाने 
कब आ कर गले मिली
कब करी आँख मिचोली
खेली मुझ से होली
भांग के नशे में
सुध बुध मैंने खो दी थी
आज कसम खाता हूँ
अगली होली पर नहीं
पियूंगा
बेचैनी से करता रहूँगा
राधा का इंतज़ार 
खूब खेलूंगा होली
खूब लगाऊंगा रंग
रचाऊंगा रास जी
भर के
मिलाऊंगा नैनों से नैन
राधा से
10-03-2012
337-71-03-12

Saturday, March 19, 2011

होली ज़रूर खेलो



होली ज़रूर खेलो
रंगों से नहीं तो
दिलों से खेलो
रंग चाहे ना डालो
गले ज़रूर मिलो
ना चाहो तो मीठा
ना खाओ
मीठा ज़रूर बोलो
मिलो ना मिलो बात
ज़रूर कर लो
होली को यादगार
बना लो
आपस के रंज
दूर कर लो
निरंतर प्यार का
रिश्ता जोड़ो
पानी बचा लो
गुलाल से खेलो
चाहे कुछ भी हो
होली ज़रूर खेलो
19-03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
451—121-03-11

Friday, March 18, 2011

उसे भी किसी के गम की याद नहीं आएगी




होली आयी
रंगों की बरसात होगी
हर तरफ टोलियाँ घूमेंगी
हास्य व्यंग की महफ़िल 
सजेगी
थालियाँ पकवानों से 
भरी होगी
जिस का कोई गया
आँखें उस की गीली होगी
पिछली होली याद आएगी
मन में उदासी होगी
निरंतर उठ रही
हंसी ठट्ठे की आवाज़
कानों में चुभेगी
थोड़ी खीज भी आएगी
किसी को किसी के गम से
क्या मतलब
सब की होली मनती रहेगी
दुखी की आत्मा दुखी रहेगी
वक़्त के साथ यादें
कम होगी
कुछ साल बाद उसकी भी
होली मनेगी
उसे भी किसी के गम की
याद नहीं आएगी
19-03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
449—119-03-11

Saturday, February 19, 2011

बचपन की होली कभी ना भूलती,हर होली पर याद आती

283—02-11

मैं भी 
होली खेलता था
कई दिन इंतज़ार करता
दोस्तों में चर्चा होती
कैसे खेलेंगे,किसे कितना रंगेंगे
रणनीती बनती
चंदे के लिए घर घर टोलियाँ
घूमती
पेड़ों की डालियाँ चोरी से
काटी जाती
पकडे जाने पर फजीहत होती
होली आती,स्कूल की छुट्टी होती
दिल में अजीब सी मस्ती होती
होली पूजी जाती,फिर जलायी जाती
रंगों की बरसात शुरू होती
थाली पकवान से भरी होती
मोहल्ले के लोगों को
खट्टी मीठी उपाधी दी जाती
रात मुश्किल से कटती
सुबह होते ही दोस्तों की
टोली बनती
गली मोहल्ले घूमती,
कभी नाचती कभी गाती
रंगों से चेहरों को छुपाती
सब एक दूजे को देख,हँसते
किस का रंग
कितने दिनों में उतरेगा
इस पर बहस होती
होली समाप्त होती
पर चर्चा कई दिन चलती
बचपन की होली कभी
ना भूलती
हर होली पर याद आती
दिल को निरंतर रोमांचित
करती
19-02-2011