Tuesday, July 24, 2012

दिल-ओ-दिमाग का अन्धेरा


दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
रात के अँधेरे से ज्यादा
गहरा होता
रात के अँधेरे के बाद
उजाला आता
दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
कहर बरपाता
रिश्तों को तोड़ता
दोस्त को दुश्मन बनाता
मन का चैन छीनता
जीने की इच्छा कम
करता
जितना खुद को परेशान
करता
उतना ही दूसरों को भी
करता
निरंतर शूल सा चुभता
रहता
विचारों को
तहस नहस करता
जीवन से खुशियाँ छीनता
दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
रात के अँधेरे से ज्यादा
गहरा होता
24-07-2012
622-19-07-12

ना जाने क्यूं


ना जाने क्यूं
उसकी तरफ खिंचता
चला जा  रहा हूँ
रोके रुकता नहीं मन
दौड़ता है उसकी तरफ
पूछता हूँ दिल से
क्यूं मिलता है सुकून
उसकी तरफ
24-07-2012
621-18-07-12

दिल को समझाता रहा


रात भर
दिल को समझाता रहा
यादों को भगाता रहा
दिल इतना बेचैन
माना ही नहीं
महबूब की यादों में
खोने को मचलता रहा
नादाँ
इतना भी नहीं समझा
दिल एक बार टूट कर
बिखर गया
तो फिर कभी नहीं
जुड़ता
24-07-2012
620-17-07-12

रोने की आदत


गुजारिश है तुमसे
मेरी हसरतों को
हवा ना दो
मुझे कमज़ोर ना
बनाओ
आदत हो गयी है
अकेले में रोने की
गर मेरी
बन भी जाओगी तुम
रोने की आदत
कैसे छूटेगी
24-07-2012
620-17-07-12


इज़हार नहीं करेंगे


चाहे हसरतों का
खून करना पड़े
दिल को तड़पना पड़े
कदम नहीं
डगमगायेंगे मेरे
मुस्काराते चेहरों  से
दिल तो लगायेंगे
इज़हार नहीं करेंगे
24-07-2012
619-16-07-12

इस दिल पर बस नहीं मेरा



इस दिल पर बस
नहीं मेरा
कितना भी समझाऊँ
समझता नहीं है
बार बार मचलता है
कोई अपना सा
ढूँढने की
जिद करता है
निरंतर भटकता है 
24-07-2012
618-15-07-12



मजबूर हूँ



खामोश रहे हैं
खामोश रहेंगे
जानते हैं
बिना जुबां खोले
हसरतें परवान नहीं
चढ़ सकतीं
हर बात इशारों से
नहीं कही जा सकती 
मजबूर हूँ
इमानदारी की फितरत
जुबान से
कुछ कहने नहीं देती
24-07-2012
617-14-07-12

Tuesday, July 17, 2012

मल्हार



वादियों में
रिम झिम फुहारों के बीच
मल्हार की
सुर सरिता गूँज रही
खुदा से फ़रियाद कर रही
तान से तान मिला लो
मेघों को
जम कर बरसा दो
प्यासी धरती की प्यास
बुझा दो
हर चेहरे को खुशियों से
भर दो
दिलों में प्रेम के सुर
डाल दो
17-07-2012
616-13-07-12

हास्य कविता-चैन से रहूँगा



पत्नी बोली हँसमुखजी से
दिल में दर्द हो रहा है
हँसमुखजी बोले
दर्द की दवा ले लो
पत्नी बोली दिल का दर्द
दवा से ठीक नहीं होगा
जवाब मिला
बाल्म लगा लो
पत्नी बोली नासमझ हो
बाल्म से भी ठीक नहीं होगा
हँसमुखजी  बोले
डाक्टर को दिखा लो
पत्नी को गुस्सा आया
जोर से गुर्राई
निपट मूर्ख भी हो
समझते नहीं हो
डाक्टर दिल के दर्द में
क्या करेगा
जवाब मिला किसी
दूसरे को दे दो
पत्नी भन्नाई
फिर तुम क्या करोगे
क्या पापड बेलोगे
हँसमुखजी बोले
तुमसे पीछा छूट जाएगा
फिर चैन से रहूँगा
17-07-2012
615-12-07-12
(सम्पूर्ण नारी जगत से प्रार्थना है,इसे हास्य तक सीमित रखें ,ह्रदय से नहीं लगायें )

दोस्त ही लगा गया आग दोस्ती में



दोस्त ही लगा गया
आग दोस्ती में
दर्द-ऐ-दिल बताया
आइना सच का दिखाया
लगा लिया दिल से
महफ़िल से ही बाहर
कर दिया
हम पर ही बेवफाई का
इलज़ाम लगा दिया
हमें दोस्ती दुश्मनी के
फर्क में उलझा गया
दोस्ती के
नाम से ही  डरा गया
दोस्त ही लगा गया
आग दोस्ती में
17-07-2012
614-11-07-12

कोई सो गया हमसे बात करते करते



कोई सो गया
हमसे बात करते करते
जगा गया हमें
रात भर के लिए
जगा दी
तमन्नाएं हमारी
ज़िन्दगी भर के लिए
खौफज़दा हूँ
क्या उन्हें याद रहेगा ?
उनका वादा
सवेरे उठते उठते
या मिलेगी हमें फिर
सौगात
नाकामयाबी की
रोते रोते
17-07-2012
613-10-07-12

अफ़साने



अफ़साने
जब भी रातों को
याद करता हूँ तुझ को
तेरी बेवफाई के
के अफ़साने
ज़हन में आ जाते हैं
इक टीस सी उठती है
दिल में
क्यूं भूलता नहीं ये
अफ़साने
कब तक रुलायेंगे मुझे
ये खौफ से भरे
अफ़साने
हर रात को जगायेंगे
ये अफ़साने
17-07-2012
612-09-07-12




हम सो कर भी सोये नहीं


हम सो कर भी
सोये नहीं
ख्वाबों में उनको
देखते रहे
वो थे की बिना
बुलाये ही आ गए
पूछा तो मुस्काराकर
कहने लगे
जाना था कहीं और
तुम्हारी ओर आ गए
जब आ ही गए तो
हमें ही देखते रहो
चले जायेंगे तो भी
बेचैनी में सो तो ना
पाओगे
हमें देखते देखते ही
रात गुजार लो
रात भर जागने का
बहाना तो ढूंढ लोगे
हम भी बिन बुलाये
मेहमान तो नहीं
कहोगे
17-07-2012
611-08-07-12



अब अपने आप से नफरत करने लगा हूँ


अब अपने आप से
नफरत करने लगा हूँ
जो नहीं कहना चाहिए
कह देता हूँ
जो नहीं सुनना चाहिए
सुन लेता हूँ
दिल के हाथो कमज़ोर
हो जाता हूँ
हर बार खुद को बेबस
सिला
उम्मीद से उलटा
पाता हूँ
लोगों की नज़रों से
उतर जाता हूँ
अब सोच रहा हूँ
दिल की सुनना छोड़ दूं
दिमाग से काम लूं
चेहरे पर चेहरा चढ़ा लूं
हर बात को तोल कर बोलूँ
लोगों को खुश कर दूं
उन्हें झूठा सुकून दे दूं
17-07-2012
610-07-07-12


अच्छा हो अब ज़ख्म ना भरे कोई


अच्छा हो अब
ज़ख्म ना भरे कोई
गुजार लिए दिन
दर्द सहते सहते कई
आदत सी पड गयी
क्यूं शौक लगाऊँ
अब नया कोई
लगा भी देगा
अगर मरहम कोई
कैसे यकीन करूँ
नया दर्द नहीं देगा
फिर कोई
इस हाल में ही खुश हूँ
बस मुस्करा देख ले
अब कोई
17-07-2012
609-06-07-12

मंजिल है अभी दूर है ,पड़ाव नहीं डालना है


इस जीत को
जीत नहीं मानना
ख्यालों को
मिला है मुकाम
इतना सा समझना
मंजिल है अभी दूर है
पड़ाव नहीं डालना
आ जाए
सफ़र में रुकावट  
तो हार नहीं मानना
हिम्मत होंसले से
निरंतर चलते रहना
बस इतना सा
जानना
17-07-2012
608-05-07-12

यूँ चेहरे को हाथों से ना छुपाओ



यूँ चेहरे को
हाथों से ना छुपाओ
चाहने वालों का
दिल ना दह्लाओ
बस इतना सा बता दो
क्या शरमा रहे हो ?
या ज़माने की नज़रों से
बच रहे हो
हम खैर ख्वाह तुम्हारे
करते हैं दुआ खुदा से
तुम्हें नज़र ना लग जाए
कम से कम हमें तो 
चेहरा दिखाओ
यूँ चेहरे को हाथों से
ना छुपाओ
17-07-2012
607-04-07-12

बौने हैं हम


बौने हैं हम
भाग्य के मारे हैं हम
पूरे हो कर भी
अधूरे हैं हम
बचपन से बुढापे तक
कोई नहीं समझता
भावनाओं को हमारी
ज़िन्दगी से लेकर
सर्कस तक हँसी के
पात्र हैं हम
तिरिस्कार सहते हैं हम
मन ही मन घुटते हैं हम
बच्चों से बूढों तक
सब को हँसाते हैं हम
जीना है इसलिए
दिखते नहीं
आंसू किसी को हमारे
खून के आंसू पीते हैं हम
चुपचाप सहते हैं हम
निरंतर
इश्वर से प्रार्थना हमारी
किसी को ना दे ऐसा
नसीब
खुद रोते हैं दूसरों को
हँसाने के लिए हम
बौने हैं हम
17-07-2012
606-03-07-12

Thursday, July 5, 2012

शुक्रिया अदा करता रहा



चेहरे पर उदासी का
मुलम्मा चढ़ाए
चलते चलते
अरसा हो गया था
हँसना ही भूल गया था
रास्ते में
ह्रदय को भाये
ऐसा साथी मिल गया
डूबते को सहारा
नाउम्मीद को
उम्मीद का साथ
मिल गया
हँसना भी याद आ गया
कुछ पल भी नहीं गुजरे
किस्मत ने चौराहे
पर ला खडा किया
मैं रुका नहीं
निरंतर चलता रहा
हँसना भी भूला नहीं
कुछ पल के साथी को
साथ निभाने का
हँसना याद दिलाने का
शुक्रिया
अदा करता रहा   
05-07-2012
605-02-07-12

खामोश रहो



खामोश रहो
कुछ मत बोलो
अपने गम अपने तक
रख लो
ना विरोध करो ना
प्रतिरोध करो
कोई कुछ कहे
चुपचाप सुन लो
ना व्यथित हो
ना आंसू बहाओ
पहले भी
तुमने विरोध किया
क्या नतीजा निकला ?
क्या सिला मिला ? 
बचा खुचा विश्वास खोया
खुद को चौराहे पर
खडा पाया
किधर जाना है?
पता नहीं था
क्यों भूल गए?
बहुत मुश्किल से खुद को
सम्हाला था
क्या बार बार ऐसा ही
चाहते हो
कब तक लड़ोगे
लोगों को बदलने की
कोशिश करोगे
बार बार हारोगे
खुद के अस्तित्व को
खतरे में डालोगे
क्यों ना समर्पण कर दो?
सबकी इच्छा का पालन
कर लो
 नाराजगी दूर कर दो
प्रभु में विश्वास रखते हो
तो उस पर छोड़ दो
वो जैसा चाहता है
वैसा ही होगा
लड़ोगे तो भी
नहीं लड़ोगे तो भी
तुम कर्म करते रहो
ईमान से जीते रहो
सब्र से सहते रहो
अब समय आ गया है
भाग्य पर छोड़ दो
जो भाग्य में लिखा है
हो जाएगा
नहीं चाहोगे तो भी
चाहोगे तो भी
05-07-2012
604-01-07-12