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Sunday, October 28, 2012

अहम् का प्रश्न



समंदर का
पानी खारा होता है
तो क्या हुआ
मछलियों को तो मीठा 
लगता
उनके जीवन का सहारा होता
ये आवश्यक तो नहीं
जो तुम्हारे लिए अच्छा
वो दूसरों के लिए भी
अच्छा हो
जो तुम्हें भाये वही
दूसरों को भी भाये
फिर क्यों चाहता है मनुष्य
सब उसकी चाहत को चाहें
उसे अहम् का प्रश्न बनाए
जो ना माने उसे नापसंद करे
812-54-28-10-2012
चाहत,जीवन,अहम्,पसंद,नापसंद,

Tuesday, March 20, 2012

थोड़ा तुम आगे बढ़ो,थोड़ा मैं आगे बढूँ


मैं रात में  देर से सोता
तुम कहती लाईट में
नींद नहीं होती
तुम भरती जोर के खर्राटे
नींद मेरी भी उडती
तुम पीती चाय ठंडी 
मुझे गर्म चाय अच्छी
लगती
मुझे पसंद मीठा
तुम्हें नमकीन पसंद
तुम्हें व्यायाम अच्छा
लगता
मुझे खेलना भाता
मैं पंखे बिना सो ना पाता
तुम्हें पंखे में जुखाम हो
जाता
मैं चलाता पंखा
तुम उसे बंद कर देती
मैं सुनता समाचार टी वी पर
तुम देखती सीरिअल
तुरंत चैनल बदल देती
बड़ी अजीब हालत है
किच किच ख़त्म नहीं होती
घर घर यही कहानी है
जो एक को पसंद
वो दूजे को नापसंद
क्या करें
या तो हर दिन
हर बात पर झगडें
या बीच का रास्ता निकालें
आओ अब अहम् को
छोड़ दें
थोड़ा तुम आगे बढ़ो
थोड़ा मैं आगे बढूँ
एक दूजे की पसंद का
ख्याल कर लें
थोड़ा तुम्हारी पसंद का
थोड़ी मेरी पसंद का कर लें
जितना भी साथ जीना
उतना खुशी से जी लें
20-03-2012
416-150-03-12