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Sunday, September 2, 2012

कैसे कहूँ मैं वो नहीं हूँ



कैसे कहूँ
मैं वो नहीं हूँ
जो तुमने समझा मुझे
मैं वो हूँ जो जाना नहीं
अब तक तुमने
ना मैं तुमसे प्यार करता
ना ही तुम्हारा दोस्त हूँ
ना रिश्तेदार ना पड़ोसी
ना जान पहचान वाला
ना तुम्हारे शहर में
रहता हूँ
ना तुमसे मिला
ना देखा कभी
मेरी बातें सुन कर
परेशान मत होना
मुझे सिर फिरा भी
मत समझना
मैंने तुम्हें मन में बसा
रखा है
मैं तुम्हारा साधक हूँ
तुम मेरी साधना
तुम्हारी साधना से
मुझे चैन मिलता है
मेरा जीना सार्थक
होता है
तुम मेरे लिए
पञ्चतत्व हो
जिनके बिना जीना
असंभव है
02-09-2012
712-08-09-12