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Wednesday, March 7, 2012

पहली बार जब चढ़ा था पर्वत पर कोई

 पहली बार
जब चढ़ा था
पर्वत पर कोई
हाथ उसके खाली थे
ना कोई औजार
ना कोई सहारा
ना हथियार
ना पैरों में जूते थे 
केवल लगन,होंसला
हिम्मत उसके साथ थे
आँखों में था सपना
पर्वत पर विजय पाने का
इन्ही के सहारे जीता था
उसने पर्वत को
क्यों फिर तुम घबराते हो
याद कर के उस महान
इंसान को
तुम भी जुट जाओ
उसकी हिम्मत
होंसले,लगन से
प्रेरित हो कर
आगे को बढ़ जाओ
तुम को भी एक दिन
सफलता मिलेगी
लक्ष्य तुम भी पाओगे
07-03-2012
315-49-03-12