परेशाँ नहीं हूँ
दिल के टूटने से
परेशाँ हूँ
सिर्फ एक बात से
क्यूं एक ही
दिल दिया खुदा ने
गर दे देता ढेर सारे
दिल मुझे
उनके हुस्न के खातिर
दिल को बार बार
टूटने देता
ज़िन्दगी के आख़िरी
लम्हे तक
उन्हें चाहना ना
छोड़ता
06-03-2012
309-43-03-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )