हर तूफ़ान के बाद
चलती हैं
अमन की हवाएं
काली रात के बाद
जगमाती हैं
सूरज की किरनें
ज़मीं को नहलाती हैं
सुनहरी धूप
रंजो गम की दुनिया से
निकल जाओ
ज़ज्बे को टूटने ना दो
सब्र से
वक़्त को गुजरने दो
फिर से हँसने का
इंतज़ार करो
निरंतर
दुआ खुदा से करो
वो दिन भी आयेगा
जब चेहरा फिर से
मुस्कराएगा
दिल-ओ-दिमाग का
सुकून लौट जाएगा
23-12-2011
1882-50-12