Showing posts with label सुकून. Show all posts
Showing posts with label सुकून. Show all posts

Tuesday, November 20, 2012

कू-ब-कू भटकता रहा



कू-ब-कू भटकता रहा
बिना दर्द के
कोई ना मिला
जिसने भी कहा
उसे दर्द नहीं
एक शख्श हँसता मिला
मैंने पूछा
क्या उसे कोई गम नहीं
नम आँखों से कहने लगा 
क्यूं मेरी बात पर
यकीं करते नहीं
कह तो रहा हूँ
मुझे कोई दर्द नहीं
कहते कहते
वो अश्क बहाने लगा
मैं भी जिद पर अड़ गया
उसके दर्द को बढ़ा दिया
फिर सवाल दाग दिया
इतना रो रहे हो
फिर भी क्यूं कहते हो
तुम्हें कोई दर्द नहीं
वो फूट फूट कर रोने लगा
सुबक सुबक कर
कहने लगा
कुछ लम्हे मन को
सुकून देने के लिए
कहता हूँ
मुझे कोई दर्द नहीं
तुमने वो भी नहीं
करने दिया    
कू-ब-कू =गली गली ,जगह जगह
852-36-20-11-2012
जीवन ,ज़िन्दगी ,दुःख,दर्द,सुकून

क्या पा लिया तुमने



क्या पा लिया तुमने
ज़िन्दगी भर ईमान की
उसूल की बातें करी तुमने
हर शख्श को
नाराज़ किया तुमने
दिल का चैन
मन का सुकून खोया तुमने
रिश्तों को तोड़ा
मन को दुखी किया तुमने
अपनों को
पराया किया तुमने
क्या मिला तुमको
सिर्फ नफरत ने
साथ दिया तुम्हारा
बेचैनी से
रिश्ता बनाया तुमने
अब भी वक़्त है
ज़माने के साथ चलो
मन में खार
दिखाने को प्यार रखो
ऊपर से नर्म दिखो
अन्दर से पत्थर हो जाओ 
या फिर चुपचाप
ज़ख्म खाते जाओ
ना शिकवा करो
ना शिकायत करो 
जुबां को लगाम दो
खुदा से दुआ करो
जो भी जैसा भी है
बर्दाश्त करो
घुट घुट कर मरते रहो
दुनिया से चले जाओ 
847-31-20-11-2012
ज़िन्दगी , ईमान ,उसूल, सुकून ,रिश्तों ,मन 

Sunday, November 11, 2012

गम अब सहारा बन गए हैं



गम अब
सहारा बन गए हैं
झूठी उम्मीदों से
बचा रहे हैं
ख़्वाबों की दुनिया से
दूर ले जा रहे हैं
दिल के
बहम मिटा रहे हैं
ज़िन्दगी की
हकीकत समझा रहे हैं
तकलीफ की जगह
सुकून दे रहे हैं
840-24-11-11-2012
गम,सुकून,शायरी,उम्मीदों

या खुदा क्यूं इतना ज़ुल्म ढाते हो



या खुदा
क्यूं इतना ज़ुल्म ढाते हो
तन्हाइयों में भी
तनहा नहीं रहने देते हो
टूटे हुए दिल को तोड़ते हो
ख्यालों में
ज़लज़ला मचाते हो
यादों को
ज़हन से ना जाने देते हो
गर इतना यकीन
तुम्हें अपने वजूद पर
तो मिला दो उससे
नहीं तो यादों से उसका
नाम-ओ-निशाँ ही मिटा दो
मुझे तन्हाई में तो
सुकून पाने दो
837-21-11-11-2012
यादें,तनहा,तन्हाइयां, सुकून

Tuesday, November 6, 2012

तुम्हें पा ना सका


तुम्हें पा ना सका
तुम्हें पा ना सका
ज़िन्दगी संवार ना सका
तन्हाई को दोस्त
सुकून को
दुश्मन बना लिया
समंदर की उम्मीद में
चुल्लू भर
पानी भी नहीं मिला
चेहरा मायूस हो गया
होंसला टूट गया
तुमने बेरुखी से कह दिया
हमने कभी मोहब्बत का
इरादा ही नहीं किया
828-12-06-11-2012
सुकून,ज़िन्दगी,तन्हाई, मोहब्बत

Wednesday, October 24, 2012

अगर ये खता है



बार बार कटघरे में
खडा किया गया
हर बार सज़ा के
काबिल पाया गया
हर बार सबने कहा
क्यों अपनों को
प्यार किया
क्यों लडखडातों को
खडा करने की कोशिश
करता रहा
अगर ये खता है
तो समझ नहीं आता
अपनों के चाहने की खता
कितनी सज़ा दिलाएंगी
अपनों की नासमझी
पता नहीं कहाँ ले जायेगी
इससे तो अच्छा है
खुद ही अलविदा कह दूं
उन्हें सुकून से रहने दूं
बची खुची ज़िन्दगी
मैं भी सुकून से काट लूं
784-27-24-10-2012
सुकून,ज़िन्दगी,खता,रिश्ते,अपने

Tuesday, October 9, 2012

उम्र के साथ सूरत बदल गयी


उम्र के साथ
सूरत बदल गयी
मगर ना
ना अंदाज़ बदला
ना सीरत बदली
गनीमत है
ज़ज्बा पहले से
बेहतर हुआ
तमन्नाएं घट गयी
उम्मीदें बरक़रार रही
सुकून मिल जाए
बस इतनी सी इच्छा
पहले भी थी
अब भी ख़त्म नहीं हुयी
769-14-09-10-2012
उम्र,सूरत,सीरत,ज़ज्बा ,तमन्नाएं,उम्मीदें,सुकून

Monday, September 3, 2012

हम भी काँटों से घिरे हुए हैं



गुलाब  की तरह
हम भी
काँटों से घिरे हुए हैं
ज़हन में
नफरत के कांटे बसाए लोग
सुकून की पंखुड़ियों को
बार बार  छेदने की
कोशिश में लगे रहते
 पर हम गुलाब जितने
किस्मत वाले नहीं
बार बार
हैरान तो होते हैं 
मगर  गुलाब से
मुस्काराना  सीखा
 वो हमें रोने नहीं देता
हम हालात को खुशी से
बर्दाश्त करते रहते
मुस्काराहट को चेहरे से
जाने ना  देते
03-09-2012
721-17-09-12


काश मन की बात आँखें जान लेती



दिल क्या कहता है
मन को पता चल जाता
मन क्या सोचता है
आँखों को खबर नहीं होती
वो वही देखती रहतीं  
जो उसे दिखाई देता
जो नहीं चाहती वो भी
देखना पड़ता
काश मन की बात
आँखें जान लेती
सुकून की
इन्तहा हो जाती
किसी और चीज़ की
ज़रुरत ना होती
03-09-2012
720-16-09-12

Sunday, September 2, 2012

होश में भी मदहोश हो बैठे



होश में भी मदहोश हो बैठे
दवा समझ कर शराब पी बैठे
उनसे नज़रें मिली तो दिल दे बैठे
सुकून की जगह बेचैनी ले बैठे
बेफिक्र हो कर सोते थे पहले
अब पलक तक झपका ना पाते
बैठे ठाले रतजगा गोद ले बैठे
दर्द-ऐ-दिल की दवा चाही थी
कातिल को चारागार समझ बैठे
चारागार –डाक्टर
02-09-2012
710-06-09-12

Tuesday, August 21, 2012

दिल बेचारा भी थक गया



दर्द-ऐ-दिल
किसी से कह ना पाया
मन ही मन घुटता रहा
दिल बेचारा भी थक गया
एक दिन कहने लगा
कब तक अकेले
ज़िन्दगी गुजारोगे
अब दर्द से किनारा
कर लो
मुझे किसी से
मिला दो
मन को सुकून
मुझ को राहत दे दो
21-08-2012
685-45-08-12

हमें क्या पता था



हमें क्या पता था 
उनकी अदाओं पर 
मर मिटेंगे हम 
सुकून की ज़िन्दगी में 
उबाल लायेंगे हम 
हमने तो यूँ ही तारीफ़ 
मैं उन्हें
दिल-ऐ-ख़ास कह दिया 
उन्होंने हकीकत में 
दिल ही हमें दे दिया
हम ठहरे नामुराद इतने 
उन्हें हकीकत से
वाकिफ करा दिया 
अब ना सो पाते हैं 
ना जाग पाते हैं 
हर लम्हा उन्हें
मनाते हैं 
वो मुंह फुलाए
 बैठे हैं
21-08-2012
675-35-08-12

Sunday, July 29, 2012

दर्द-ऐ-दिल किसी से कह ना सका



दर्द-ऐ-दिल
किसी से कह ना सका
मन ही मन घुटता रहा
दिल बेचारा भी
थक गया
एक दिन कहने लगा
कब तक अकेले
ज़िन्दगी गुजारोगे
अब दर्द से किनारा
कर लो
किसी और से मुझे
मिला दो
मन को सुकून
मुझ को राहत दे दो
29-07-2012
631-28-07-12

Tuesday, July 24, 2012

ना जाने क्यूं


ना जाने क्यूं
उसकी तरफ खिंचता
चला जा  रहा हूँ
रोके रुकता नहीं मन
दौड़ता है उसकी तरफ
पूछता हूँ दिल से
क्यूं मिलता है सुकून
उसकी तरफ
24-07-2012
621-18-07-12

Thursday, June 7, 2012

ना अब उम्मीद करते हैं,ना दुआ करते हैं



ना अब
उम्मीद करते हैं
ना दुआ करते हैं
किस्मत समझ
चुपचाप सहते हैं
अब तक
मिला नहीं सुकून
अब मिल भी जाए तो
तो खुश हो लेंगे
ना मिला तो
हमेशा की तरह
सह लेंगे
चुपचाप रो लेंगे
07-06-2012
581-31-06-12

कोई बता दे उसे कैसे मनाऊँ


ज़िन्दगी से लड़ते
उलझते थक गया हूँ
अब कहाँ से हिम्मत
कहाँ से सुकून लाऊँ
मिलते नहीं बाज़ार में
जो धन दौलत से
खरीद कर लाऊँ
दहशत का साया
ज़हन में छाया हुआ
कैसे उससे निजात पाऊँ
चेहरे पर हँसी का मुलम्मा
चढ़ाए घूम रहा हूँ
स्वछन्द हँसी कहाँ से लाऊँ
ज़ख्मों से भर गया है दिल
कौन सा मलहम लगाऊँ
अब सहारा
सिर्फ खुदा का बचा है
कोई बता दे उसे
कैसे मनाऊँ
07-06-2012
579-29-06-12

Saturday, June 2, 2012

सब आँखें बंद कर चल रहे हैं



सब आँखें
बंद कर चल रहे हैं
फिर भी गिरने से
डर रहे हैं
सुकून की तलाश में
नफरत के
शोले भड़का रहे हैं
काँटों की डगर को
फूलों की
सेज समझ रहे हैं
बंद पलकों से
सुनहरे सपने देख रहे हैं
खुद पत्थर मार रहे हैं
फूलों की ख्वाहिश
रख रहे हैं

सब आँखें
बंद कर चल रहे हैं

02-06-2012
551-71-05-12

Wednesday, May 30, 2012

उनसे मेरी मुलाक़ात करा दे

खुदा से इल्तजा है
ज़िन्दगी की चादर से
हसरतों की नाकामियों के
दाग मिटा दे
सूखे हुए आंसूओं को
कामयाबी के पानी से
धो दे
मोहब्बत के सफ़र में
 गिरता पड़ता रहा हूँ
राह को थोड़ा आसान
बना दे
उनसे मेरी मुलाक़ात
करा दे
तडपते हुए दिल को
सुकून दे दे
30-05-2012
548-68-05-12