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Sunday, September 2, 2012

होश में भी मदहोश हो बैठे



होश में भी मदहोश हो बैठे
दवा समझ कर शराब पी बैठे
उनसे नज़रें मिली तो दिल दे बैठे
सुकून की जगह बेचैनी ले बैठे
बेफिक्र हो कर सोते थे पहले
अब पलक तक झपका ना पाते
बैठे ठाले रतजगा गोद ले बैठे
दर्द-ऐ-दिल की दवा चाही थी
कातिल को चारागार समझ बैठे
चारागार –डाक्टर
02-09-2012
710-06-09-12

Thursday, March 1, 2012

अगर वो खुद आ जाती तो .........


01-03-2012
267-02-03-12

Tuesday, February 7, 2012

तुम्हारा अहसास ही काफी है


तुम्हारी हर अदा
जहन में 
उतर जाती है
तुम्हारी हर बात
दिल को छूती है
तुम्हारी खुशबू
मदहोश करती है
तुम्हें पाया तो नहीं
जीने के लिए
तुम्हारा अहसास ही
काफी है
07-02-2012
115-26-02-12

Monday, January 30, 2012

मदहोश

वो अपने हुस्न में
इतना मदहोश हैं
उन्हें ख्याल ही नहीं 
हम रोज़ ख़्वाबों में
उनसे मिलते हैं
उनसे गुफ्तगू करते हैं
हर जिस चीज़ के लिए
वो होश में ना करते हैं
ख़्वाबों में
खुद पहल करते हैं
हमारी हसरतों को
बड़े अंदाज़ से
अंजाम तक पहुंचाते हैं
30-01-2012
87-87-01-12

Saturday, July 30, 2011

क्यूं शराब पीकर मदहोश होता ?

क्यूं शराब पीकर

मदहोश होता ?

लम्हा लम्हा उसे

याद करता

ग़मों को भूलने की

कोशिश करता

कामयाब अभी तक

हुआ नहीं

ना गम भूला ना

उसको भूला

हकीकत से वाकिफ

हो जा

जाने वाला लौट कर

आता नहीं

क्यूं ना उसको ही

भूल जाता ?

निरंतर जिसके खातिर

जाम भर भर पीता

मयखाना आबाद

करता

रोज़ रो रो कर

मरता

उसकी रूह को भी

दुखी करता

30-07-2011

1270-154-07-11