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Saturday, December 15, 2012

चाहता हूँ



चाहता हूँ
दो कदम चलूँ
मंजिल मिल जाए
मैं मुस्कराऊँ भर
लोग गले से लग जाएँ
मैं हकीकत से दूर रहूँ
जो भी चाहूँ वैसा हो जाए
ये ख्वाहिश तो हर
इन्सान की
पर खुदा की बतायी
राह पर तो चलो
कभी ये भी तो याद
आ जाए
945-64-15-12-2012 
शायरी, ख्वाहिश, हकीकत, खुदा,इश्वर,

Tuesday, June 5, 2012

झीना सा पर्दा



खूबसूरत
गुलाबी चेहरा
नागिन से लहराते
बाल
झील सी गहरी
नीली आँखें
रस भरे पतले होठ
मचल करहवा में
उड़ता हुआ दुपट्टा
तितली जैसे
रंग बिरंगे परिधान में
परी लग रही थी
शिकारी से बेखबर
हिरनी की
मदमाती चाल से
चली आ रही थी
चाहते हुए भी उसे
छू नहीं सका
ख्वाब और हकीकत
के बीच
एक झीना सा पर्दा था
उधर वो थी ,इधर में था

ये हकीकत नहीं
रोज़ दिखने वाला 
ख्वाब था
05-06-2012
563-13-06-12


Sunday, June 3, 2012

आज फिर ज़ख्म हरे हो गए

आज फिर ज़ख्म हरे
हो गए
वो हमारे सामने से
निकल गए
देख कर भी अनदेखा
कर गए
अपनी तंगदिली पर
मोहर लगा गए
ये ज़रूरी नहीं है
खूबसूरत चेहरों के
दिल भी खूबसूरत हो
हमें हकीकत से
रूबरू करा गए
03-06-2012
558-78-05-12

Wednesday, May 30, 2012

हसरतों की नुमाइश

कोई कह रहा था
वो हमें
याद भी नहीं करते
ना जाने हकीकत
बता रहा था
या दिल जला रहा था
इतना ज़रूर पता है
खुद की हसरतों की
नुमाइश कर रहा था
30-05-2012
546-66-05-12

Monday, May 28, 2012

दिल-ऐ-कातिल



देखा जो
चेहरा उनका करीब से
जान ली हकीकत
छुपी थी जो चमकते
चेहरे के पीछे
दिखा एक
दिल-ऐ-कातिल  मुझे
मासूमियत के पीछे
या तो हकीकत
भूल जाऊँ
उनसे दिल लगाता रहूँ
शौक-ऐ-मोहब्बत में
पेश कर दूं
दिल को
क़त्ल होने के लिए
या उन्हें भूल जाऊँ
बचा लूं जान
दिल के
क़त्ल होने से पहले
28-05-2012
535-55-05-12

Thursday, March 15, 2012

चेहरे पर दर्द ही क्यों देखते हो

हमारे चेहरे पर
दर्द ही क्यों देखते हो
दिल में झाँक कर भी 
तो देखो
हमदर्दी से लबरेज़ 
 दर्द के साथ मोहब्बत 
भी ज़िंदा है उस में
भाई चारे से जीने की
ख्वाइश भी है इसमें
ये भी हकीकत है
कई बार अपनों से 
चोट खाई है
पर उनके नाम का
खुलासा नहीं करते
कभी
जब याद आ जाते हैं
वो वाकये
ना चाहते हुए भी
चेहरे पर दर्द आ
जाता है
15-03-2012
382-116-03-12

Friday, March 9, 2012

अब खुद को आजमाऊंगा

बहुत आजमा लिया
ज़माने को
अब खुद को आजमाऊंगा
अँधेरे से लौट कर
उजाले में आऊँगा
हिम्मत होंसले से
लडूंगा
ज़ज्बा नहीं खोऊँगा
खुद पर यकीन रखूंगा
उम्मीदों को हकीकत में
बदल दूंगा
फिर से मुस्काराऊंगा
निरंतर खुशियाँ
मनाऊंगा
09-03-2012
331-65-03-12