Showing posts with label होश. Show all posts
Showing posts with label होश. Show all posts

Sunday, September 2, 2012

होश में भी मदहोश हो बैठे



होश में भी मदहोश हो बैठे
दवा समझ कर शराब पी बैठे
उनसे नज़रें मिली तो दिल दे बैठे
सुकून की जगह बेचैनी ले बैठे
बेफिक्र हो कर सोते थे पहले
अब पलक तक झपका ना पाते
बैठे ठाले रतजगा गोद ले बैठे
दर्द-ऐ-दिल की दवा चाही थी
कातिल को चारागार समझ बैठे
चारागार –डाक्टर
02-09-2012
710-06-09-12

Friday, September 9, 2011

वो होश में नहीं मैं कैसे होश में रहूँ

मैं कैसे होश में रहूँ
वो गम में डूबे हुए
मैं खुशी कैसे मनाऊँ
वो अश्क बहा रहे
मैं कैसे मुस्कुराऊँ
वो नासाज़
मैं कैसे खुद को
ठीक समझूं
वो बेबस खामोश
मैं कैसे कोई गीत
सुनाऊँ
वो थके मांदे  बैठे
मैं कैसे
निरंतर चलता रहूँ
09-09-2011
1472-44--09-11

Monday, July 18, 2011

बीते कल को दफ़न करने में लगा हूँ

मोहब्बत में खो
गया था
खुद को  भूल
गया था
जब होश आया तो
लुट चुका था
बिलकुल अकेला था
बेवफायी में बिखर
गया था
अब खुद को
समेटने की कोशिश में
लगा हूँ
निरंतर बीते कल को
दफ़न करने में
लगा हूँ
18-07-2011
1203-83-07-11