भीड़ से घिरा हूँ
फिर भी अकेला हूँ
बिना आवाज़ का
साज़ हूँ
किसी अपने की
तलाश में भटक
रहा हूँ
निरंतर अँधेरे में
उजाला
ज़िन्दगी में
सुर ढूंढ रहा हूँ
कोई समझ सके
मुझको
ऐसा दोस्त खोज
रहा हूँ
09-11-2011
1765-33-11-11
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )