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Saturday, November 19, 2011

ख्वाईशें दम तोडती रही


जब भी मिलते
निरंतर कहते हम से
किसी दिन
फुरसत में बात करेंगे
उनकी
फ़ुरसत के इंतज़ार में
उम्र बीत गयी
ना उन्हें फुरसत मिली
ना हमारी हसरतें
पूरी हुयी
ख्वाईशें
दम तोडती रही
दिल की बात
दिल में रह गयी
19-11-2011
1799-70-11-11

Thursday, September 22, 2011

तमन्ना जो भी की हमने

तमन्ना जो भी की हमने
वो नहीं मिला हमें
जो भी मिला तमन्ना से
कम नहीं मिला हमें
जिन्हें चाहा था साथ
ज़िन्दगी भर निभाएं हमारा
छोड़ गए वक़्त से पहले हमें
गिला इसका तो ज़रूर हमें  
पर जो भी बिन मांगे मिला
उसने भी रखा खुश हमें
ख्वाईशें निरंतर बढ़ रहीं
पूरी ना होंगी ,है पता हमें
जो मिलेगा होगा मंज़ूर हमें
जाना होगा दुनिया से जब  
ना होगा गम ना खुशी हमें
मान कर फैसला खुदा का
चुपचाप चले जायेंगे हम
इल्तजा कर के जायेंगे
कोई याद ना रखे हमें
22-09-2011
1544-115-09-11

Friday, August 19, 2011

पता नहीं मिलेंगे या नहीं ?

भी आ रहे हैं
दूर खड़े
मुस्करा भी रहे हैं
इशारा भी कर
रहे हैं
पता नहीं
मिलेंगे या नहीं ?
या मरीचिका सा 
लुभाएँगे
ख्वाईशें जगायेंगे
करीब जाने पर
लुप्त हो जायेंगे
सदा की तरह
अकेला  
रह जाऊंगा
19-08-2011
1384-106-08-11

Monday, June 20, 2011

हर हसरत पूरी होती नहीं

रात को ओस
दरख्तों पर गिरती
सुबह धूप की गर्मी से
भाप बन उडती 
ज़िन्दगी भी आती
वक़्त की 
गर्मी से जाती ज़रूर
यादें पीछे रह जाती
कुछ आँखें 
नम होती ज़रूर
दिल में मिलने की
खलिश उठती
हर हसरत 
पूरी होती नहीं
कुछ अधूरी रहती 
ज़रूर
निरंतर सब मिलता नहीं
ज़िन्दगी में
कुछ ख्वाईशें दबी
रह जाती ज़रूर
20-06-2011
1073-100-06-11 
(खलिश =कसक,पीड़ा)