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Saturday, November 3, 2012

कभी कभी मैं भी भावों में बह जाता हूँ



कभी कभी मैं भी
भावों में बह जाता हूँ
मुस्काराहट के साथ कही
हर बात को सच मान लेता हूँ
चेहरे पर चढ़ा चेहरा
नहीं पहचान पाता हूँ
चोट खाता हूँ तो
बौखला कर तय करता हूँ
मुस्काराते चेहरों पर
विश्वास करना छोड़ दूंगा
मीठी बातों के
जाल में नहीं फसूँगा
कुछ दिन निश्चय पर
दृढ रहता हूँ
फिर भावों में बह जाता हूँ
मुस्काराते चेहरों की
बातों में फंस जाता हूँ
मुस्काराहट मेरी कमजोरी
दुनिया को बता देता हूँ
818-02-03-11-2012
भाव,मुस्काराहट,मुस्काराते,जीवन

Monday, September 3, 2012

हम भी काँटों से घिरे हुए हैं



गुलाब  की तरह
हम भी
काँटों से घिरे हुए हैं
ज़हन में
नफरत के कांटे बसाए लोग
सुकून की पंखुड़ियों को
बार बार  छेदने की
कोशिश में लगे रहते
 पर हम गुलाब जितने
किस्मत वाले नहीं
बार बार
हैरान तो होते हैं 
मगर  गुलाब से
मुस्काराना  सीखा
 वो हमें रोने नहीं देता
हम हालात को खुशी से
बर्दाश्त करते रहते
मुस्काराहट को चेहरे से
जाने ना  देते
03-09-2012
721-17-09-12


Tuesday, June 5, 2012

पहली मुलाक़ात



उसके
पैरों  की पायल
हाथों की चूड़ियाँ
आज कुछ ज्यादा ही
खनक रही थी
चेहरे पर मुस्काराहट
कम होने का
नाम नहीं ले रही थी
ऐसे लग रहा था
जैसे चिड़िया को
घोंसला
तडपती मछली को
पानी मिल गया
आज प्रियतम से
उसकी पहली
मुलाक़ात हुयी थी
05-06-2012
566-16-06-12

Monday, May 28, 2012

मेरे चेहरे पर झलकता है दर्द जब



मेरे चेहरे पर
झलकता है दर्द जब
उनके चेहरे पर
मुस्काराहट आ जाती
कितनी मोहब्बत हैं
हमसे 
असलियत पता 
चल जाती
28-05-2012
538-58-05-12

Thursday, March 8, 2012

ना जाने कब तक सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा


जब भी हम उनसे
उनका फैसला पूंछते हैं 
वो हौले से मुस्कारा
देते हैं
हमारी इल्तजा को
हवा में उड़ा देते हैं
जवाब में हम भी
खिसिया कर मुस्कारा
देते हैं
ना जाने कब तक सिलसिला
यूँ ही चलता रहेगा
उनका फैसला-ऐ-दिल
हमें मालूम चलेगा
तब तक तो हमें
उम्मीद में जीना ही
पडेगा
उनके नाज़ नखरों को
यूँ ही उठाना पडेगा
07-03-2012
319-53-03-12

Tuesday, February 7, 2012

आरजू अभी मिटी नहीं

किसी से
शिकवा शिकायत नहीं
किस्मत ही कुछ ऐसी है
जो समझ सके मुझको
ऐसा कोई मिला ही नहीं
आरजू अभी मिटी नहीं
होंसला भी कम हुआ नहीं
उम्मीद अब भी बाकी है
कहीं तो कोई कली
ऐसी भी होगी
जो अब तक कहीं
खिली नहीं
मेरे दिल के बगीचे में
आकर बस जायेगी
मुझे अपना समझ
अपनायेगी
मेरे सब्र का सिला देगी
अपनी महक से
मुझे सरोबार करेगी
चेहरे को मुस्काराहट से
सजायेगी
07-02-2012
120-31-02-12

Sunday, November 6, 2011

दिल ही कमबख्त नादाँ है


घबरा कर 
हर बार कहते हैं
अब किसी से नज़रें
ना मिलायेंगे 
ना किसी से दिल
लगायेंगे
कोई बुलावा दे भी दे
 तो मुंह फिरायेंगे
पर क्या करें
दिल ही कमबख्त
नादाँ है
मानता ही नहीं
सिर्फ मुस्काराहट पर
बिछ जाता है
फिर से फंस जाता है
निरंतर
धोखा खाता है
06-11-2011
1750-19-11-11