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Tuesday, April 3, 2012

फैसला हो ना सका

एक फूल चमेली का
टहनी से जुदा किया
बालों में लगाऊँ
या कई फूल जोड़ कर
गजरा बनाऊँ
सोचते सोचते वक़्त
गुजर गया
फूल मुरझा गया 
इसे अपना बनाऊँ 
या उसे अपनाऊँ
फैसला हो ना सका
सोचते सोचते
ना ये मिला ना वो मिला
कुंवारापन बोझ बन गया
बुढापा आ गया
जीना दुश्वार हो गया
03-04-2012
427-07-04-12

Thursday, March 8, 2012

ना जाने कब तक सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा


जब भी हम उनसे
उनका फैसला पूंछते हैं 
वो हौले से मुस्कारा
देते हैं
हमारी इल्तजा को
हवा में उड़ा देते हैं
जवाब में हम भी
खिसिया कर मुस्कारा
देते हैं
ना जाने कब तक सिलसिला
यूँ ही चलता रहेगा
उनका फैसला-ऐ-दिल
हमें मालूम चलेगा
तब तक तो हमें
उम्मीद में जीना ही
पडेगा
उनके नाज़ नखरों को
यूँ ही उठाना पडेगा
07-03-2012
319-53-03-12

Friday, February 24, 2012

अब फैसला होना चाहिए

अब फैसला होना
चाहिए
सुकून दोनों को मिलना
चाहिए
या तो साथ मिल कर चलो
या चलो
अपनी अपनी डगर पर
ना करो
कभी किसी को याद
ना लगाओ
इलज़ाम इक दूजे पर
ना करो  इज्ज़त हतक
ना रखो रंज मन में
ना ही पालो दुश्मनी
बहुत हो चुका मान
मुनव्वल
बहुत हो चुका सर
फुटव्वल
खून और ना बहाना
चाहिए 
बहुत कर लिया बुरा
इक दूजे का
हाल-ऐ-किस्मत छोड़ दो
खुद को
अब फैसला होना
चाहिए
 24-02-2012
234-145-02-12

Saturday, August 27, 2011

अब फैसला कीजिए

पानी सर से
गुजर जाए
हम मोहब्बत में
डूब जाएँ 
उस से पहले
फैसला कीजिये
या तो हाँ कीजिए,
अपना पता बताइए
पैगाम भिजवाइए
कुछ गुफ्तगू कीजिए
या फिर ना कहिए
ख्वाइशों को खामोश
कीजिए
कोई और मुकाम
तलाश करने दीजिए
कुछ तो कीजिए
निरंतर यूँ ना सताइए
और ना तरसाइए
अब फैसला कीजिए
27-08-2011
11406-128-08-11