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Thursday, October 25, 2012

ठण्ड का अहसास



जेठ की तेज़ गर्मी से
लहुलुहान दोपहर
लू से घबराकर
हर आदमी घर में
दुबका हुआ
चिड़ियाएँ खोमोशी से
घोंसलों में नींद ले रही
लू और गर्मी से
बिना घबराए
वो उसके इंतजार में
गली के नुक्कड़ पर
खड़े हो कर
रोज़ उसका इंतज़ार
करता
यही तो वो मौक़ा
किसी की नज़रों में आये
बिना वो अकेले में
उससे मिल सकता
तेज़ गर्मी और लू में भी उसे
ठण्ड का अहसास मिलता
792-34-25-10-2012
मोहब्बत,इंतज़ार,मुलाक़ात,अहसास

Tuesday, June 5, 2012

पहली मुलाक़ात



उसके
पैरों  की पायल
हाथों की चूड़ियाँ
आज कुछ ज्यादा ही
खनक रही थी
चेहरे पर मुस्काराहट
कम होने का
नाम नहीं ले रही थी
ऐसे लग रहा था
जैसे चिड़िया को
घोंसला
तडपती मछली को
पानी मिल गया
आज प्रियतम से
उसकी पहली
मुलाक़ात हुयी थी
05-06-2012
566-16-06-12

Saturday, December 31, 2011

क्षणिकाएं -12


मैं हारा

मैं हारा
तो क्यों हारा
दूसरा जीता
तो क्यों जीता
माँ
माँ
की नहीं मानते
माँ के लाल
माँ फिर भी
उनके लिए बेहाल
मन-दिल
मन बूढा नहीं
होता
सोच हो जाता है
दिल बूढा नहीं
होता
इकरार का तरीका
बदल जाता है
मन मिलना
या तो वो थोड़े
बड़े होते
या मैं थोड़ा
छोटा होता
फिर भी क्या पता ?
मन मिलते या
ना मिलते
मुश्किल
कहना भी मुश्किल
चुप रहना भी
मुश्किल
सहना भी मुश्किल
जीना भी मुश्किल
मुलाक़ात
उनसे
मुलाक़ात तो हुयी
मगर
बात नहीं हुयी
नींद ज़रूर
हराम हो गयी
बैठे ठाले जान की
आफत हो गयी
"मैं "
दबी हुयी कुंठा की
अभिव्यक्ती
मन की पीड़ा
बहुतों को चाहता हूँ
कहते हुए डरता हूँ
सलाह
सलाह देने का
शौक सबको
लेना पसंद नहीं
किसीको
जब सहना ही है
जब सहना ही है
तो रोना क्यों?
31-12-2011
1901-69-12

Thursday, December 22, 2011

उनको शिकायत है


यूँ मिले की
मुलाक़ात ना हो सकी
नज़रों से नज़रें मिली
होंठ भी काँपे
मगर बात ना हो सकी
दिल की दिल में
रह गयी
किश्ती किनारे से
दूर रह गयी
आँखें
 रोते रोते थक गयी
फिर भी
उनको शिकायत है
हमने
कोशिश नहीं करी
22-12-2011
1880-48-12

Friday, October 7, 2011

अजीब सी मुलाक़ात थी


अजीब सी
मुलाक़ात थी
ना बात हुयी,
ना आँखें चार हुयी
मेरा ज़िक्र होने पर
,उनका चेहरा शर्म से 
सुर्ख गुलाबी हो गया
उन्होंने उसे हाथों में
छुपा लिया
रात ख़्वाबों में आकर
किसी फ़रिश्ते ने सारा
वाकया बयान किया
मैं सुनता रह गया
एक लफ्ज़ ना कह सका
रात भर उन के ख्यालों में
खोता रहा
जहन में उनका अक्स
बना लिया
लगा अब सामने
आएँगे
चेहरा अपना दिखाएँगे
ना वो आये
ना मुलाक़ात हुयी
ना आखें चार हुयी
बिना मिले ही उनसे
मिल लिया
दिल उन को दे दिया 
07-10-2011
1623-31-10-11