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Thursday, June 7, 2012

कोई बता दे उसे कैसे मनाऊँ


ज़िन्दगी से लड़ते
उलझते थक गया हूँ
अब कहाँ से हिम्मत
कहाँ से सुकून लाऊँ
मिलते नहीं बाज़ार में
जो धन दौलत से
खरीद कर लाऊँ
दहशत का साया
ज़हन में छाया हुआ
कैसे उससे निजात पाऊँ
चेहरे पर हँसी का मुलम्मा
चढ़ाए घूम रहा हूँ
स्वछन्द हँसी कहाँ से लाऊँ
ज़ख्मों से भर गया है दिल
कौन सा मलहम लगाऊँ
अब सहारा
सिर्फ खुदा का बचा है
कोई बता दे उसे
कैसे मनाऊँ
07-06-2012
579-29-06-12

Sunday, March 18, 2012

ज़िन्दगी में पहले सी रवानी नहीं होगी

वक़्त से पहले ही 
साथी के साथ
सफ़र अधूरा रह गया
यादें सहारा,
रोना साथी,बन गया
वक़्त के साथ
ये घड़ी भी कभी
गुजरेगी
फिर भी यादें
दिल दिमाग पर
दस्तक देती रहेंगी
चैन से
रहने नहीं देगी
अकेलापन कचोटेगा
बहारों में सुगंध
ज़िन्दगी में पहले सी
रवानी नहीं होगी,
18-03-2012
403-137-03-12

Saturday, March 17, 2012

जो बनते हैं सहारा लोगों के

जो बनते हैं सहारा
लोगों के
हिम्मत होंसला बढाते हैं
रोते से हंसाते हैं उनको
बांटते हैं मुस्कान ज़माने को
उन्हें खुद का ख्याल नहीं
खुद अँधेरे कमरे में बैठे
सह रहे हैं
कैसे समझाए उन्हें कोई
अँधेरे को छोड़
उजाले में आ जाओ
कुछ अपना भी ख्याल करो
चाहने वालों को मायूस
ना करो
जिन्हें हंसाया था बड़ी
मुश्किल से
उन्हें फिर से ना रुलाओ
17-03-2012
391-125-03-12

Saturday, March 10, 2012

कुछ तो ख़ास होगा उनमें ,जो मन करता उनसे बात करूँ

कुछ तो
ख़ास होगा उनमें
जो मन करता उनसे
बात करूँ
मन खुश होता
ह्रदय तृप्त होता
भावनाओं को चैन का
अहसास होता
मन के पक्षी को
उड़ने को आकाश
मिलता
ह्रदय को अपनापन
लगता
भावनाओं को विश्राम
मिलता
बेचैनी को विदायी
उम्मीदों को सहारा
मन को विश्वास
ह्रदय को आराम
मिलता
जो मिलता नहीं
अपनों से
वो उनसे मिलता
कुछ तो
ख़ास होगा उनमें
जो मन करता उनसे
बात करूँ
10-03-2012
338-72-03-12

Friday, January 6, 2012

अब क्यों पहचानेगा कोई मुझको?


अब क्यों पहचानेगा
कोई मुझको
सब चढ़ गए सफलता की
सीढ़ियों पर सीढियां
सहारा ले कर पहुँच गए
इतनी ऊंचाई पर
दिखता नहीं कोई उन्हें
वहां से
मैं जहां था वहीँ खडा हूँ
अब भी हाथ वैसे ही
बढाता हूँ
जिसे लेना है जी भर कर
ले ले सहारा मेरा
निरंतर
सफलता की सीढियां
चढ़ता जा
आकाश कीऊचाइयों को
छूता जा
याद करे तो फितरत
उसकी
नहीं करे तो इच्छा
उसकी
बस इतना सा याद
रख ले
उतरेगा जब भी नीचे
कोई ना पहचानेगा उसे
रोयेगा तो भी
कंधे पर हाथ नहीं
रखेगा
कोई उसके
06-01-2012
15-15-01-12

Sunday, November 6, 2011

सुकून चाहा,मिल ना सका



सुकून चाहा 
मिल ना सका
जितना खोजा उतना
उलझता गया
कईओं से सहारा माँगा
दिलासा सब ने दिया
कंधा किसी से ना मिला
हर इंसान को खुद में
डूबा पाया
क़त्ल नहीं किया 
फिर भी सबको मुझ में
कातिल नज़र आया
निरंतर
कोशिशों के बाद भी
रास्ता ना निकल पाया
खुद को चौराहे पर
खडा पाया
06-11-2011
1749-18-11-11