Showing posts with label साथी. Show all posts
Showing posts with label साथी. Show all posts

Saturday, December 15, 2012

जो भी हँस कर मिलता मुझसे



जो भी
हँस कर मिलता मुझसे
उस से ही मिल लेता हूँ
कुछ पल हँस लेता हूँ
सोचता नहीं हूँ
कब तक साथ हंसेगा
कब तक साथ निभाएगा
जिनसे थी आशाएं
खाई थी अनगिनत कसमें
जीवन भर साथ निभाने की
जिन्हें माना था जीवन ज्योती
वो ही जब
बिना बताये चले गए
घनघोर
अन्धेरा पीछे छोड़ गए
किसी और से क्या आशा करूँ
जो भी
दो पल हँस कर मिलता
अब उसे ही अपना
समझता हूँ
958-77-15-12-2012
मित्र,मित्रता,जीवन,साथी,

Monday, June 25, 2012

कितनी नावें,कितने मांझी बदलोगे


कितनी नावें

कितने मांझी बदलोगे
कितने दोस्त
कितने साथी बदलोगे
अब अपनी
इस फितरत को
विराम
मचलते मन को
विश्राम दे दो
ज़िन्दगी की डगमगाती
किश्ती को संभाल लो
खुदा के वास्ते
जान लो
एक ही साथ काफी
होता है
ज़िन्दगी के सफ़र में
अब किसी पर तो
यकीन कर लो
ज़िन्दगी की पतवार
उसके हाथ में दे दो
हँसते गाते सफ़र
पूरा कर लो
25-06-2012
592-42-06-12

Sunday, March 18, 2012

ज़िन्दगी में पहले सी रवानी नहीं होगी

वक़्त से पहले ही 
साथी के साथ
सफ़र अधूरा रह गया
यादें सहारा,
रोना साथी,बन गया
वक़्त के साथ
ये घड़ी भी कभी
गुजरेगी
फिर भी यादें
दिल दिमाग पर
दस्तक देती रहेंगी
चैन से
रहने नहीं देगी
अकेलापन कचोटेगा
बहारों में सुगंध
ज़िन्दगी में पहले सी
रवानी नहीं होगी,
18-03-2012
403-137-03-12

Monday, July 11, 2011

जाने वाले चले गए

जाने वाले 
चले गए
साथी  सफ़र में
अकेले रह गए
कुछ आँखों को
अश्कों से लबालब 
कर गए
खट्टी,मीठी यादों को
पीछे छोड़ गए
निरंतर हंसने,रोने के
बहाने दे गए
जाने के बाद का हाल
बयाँ कर गए
11-07-2011
1167-51-07-11