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Wednesday, November 28, 2012

मेरे जाने के बाद



मेरे जाने के बाद भी 
मेरे चाहने 
ना चाहने वालों से 
मिलूंगा ज़रूर
चाहे ख़्वाबों में मिलूँ 
या ख्यालों में आऊँ 
जो भी कहता हूँ 
जो भी लिखता हूँ 
याद दिलाऊंगा ज़रूर 
भले ही बुझ जाए 
मेरी ज़िन्दगी के 
चिराग की रोशनी 
पर मेरे ख्यालों की 
रोशनी ज़हन में 
ज़लाऊंगा ज़रूर 
मेरे ख्याल ही कहते हैं 
मुझसे 
आज मेरी बात मानों 
ना मानों 
चाहे आज पढो ना पढो 
पर बात कहूंगा ज़रूर 
चाहे मेरे जाने के बाद 
ही सही 
एक दिन सोचने पर 
मजबूर करूंगा ज़रूर
871-55-28-11-2012
विचार,ख्याल,सोच 

Friday, November 16, 2012

ख्याल उमड़ रहे मन में ,उन्हें आने से क्यों रोकूँ



ख्याल उमड़ रहे मन में
उन्हें आने से क्यों रोकूँ 
लफ्ज़ निकल रहे कलम से
उन्हें रोकूँ तो भी क्यों रोकूँ
हाल-ऐ-दिल सुनाने को बेताब हूँ
खुद को रोकूँ भी तो क्यों रोकूँ
बचे नहीं दुनिया में
दिल की सुननेवाले
सब लगे हैं अपनी सुनाने में
तो पढने वालों को क्यों रोकूँ
जानता हूँ ना देगा कोई सहारा
ना समझेगा बात मन की
भूले से भी गर दे दी
 दुआएं किसी ने
उसे दुआ देने से क्यों रोकूँ
843-27-16-11-2012
ख्याल,विचार,हाल-ऐ-दिल ,शायरी

Monday, September 3, 2012

अब कोई मुझे मनहूस ना समझे


बरसात की बूँदें
जब कमरे की खिड़की पर
टप टप कर दस्तक देती हैं
ख्याल में डूब जाता हूँ
कभी खुदा भी
मेरी किस्मत पर
रहम की बरसात कर
ऐसी ही आवाज़ से
सारी दुनिया को बता दे
मेरी बदकिस्मती ख़त्म
हो गयी है
अब कोई मुझे मनहूस
ना समझे
03-09-2012
718-14-09-12

Tuesday, August 21, 2012

रात को जब नींद नहीं आती है



रात को जब
नींद नहीं आती है
ख्याल परेशान करते हैं
तुम्हें याद करने लगता हूँ
ख़्वाबों में मिलने की
ख्व्हाइश करता हूँ
तुम कहोगी
तुम जुदा हो चुकी मुझ से
फिर क्यों तुम्हें याद
करता हूँ ?
मेरा जवाब सुन कर
नाराज़ ना होना
जब परेशान ही होना है
तो क्यों नहीं तुम्हें ही
याद करूँ
तुम्हारा सुन्दर चेहरा तो
दिखेगा
जुदाई में भी मिलन का
अहसास तो होगा मुझको
21-08-2012
680-40-08-12



Sunday, June 3, 2012

कैसे कहूँ ?

कैसे कहूँ ?
तुम्हारे ख्याल भर से
दिल में कुछ होता है
हसरतें अंगडाई लेने
लगती
उम्मीदें मुंह उठाने
लगती
लफ्ज होठों की
दहलीज पर आ कर
रुक जाते हैं
ना सुनने के खौफ से
डर जाते हैं
मन की बात मन में ही
रह जाती है
हर लम्हा तडपाती है
कैसे कहूँ
तुम्हारे ख्याल भर से
क्या कुछ सहता हूँ
03-06-2012
560-80-05-12

जब से मिला हूँ तुमसे

जब से मिला हूँ तुमसे
जो काटने को दौड़ता था
अब अच्छा लगने लगा
मन खुश
दिल मदहोश रहने लगा
चेहरा चमकने लगा
जब से मिला हूँ तुमसे
रातों को जागने
दिन में ख्वाब देखने लगा
ख्यालों में खोने लगा
जब से मिला हूँ तुमसे
आसमान में उड़ने का
नाचने गाने का मन
करने लगा
जीने का मकसद
मिल गया
जब से मिला हूँ तुमसे
खुदा पर यकीन होने लगा
निरंतर दुआ करने लगा
जब से मिला हूँ तुमसे
सब कुछ बदल गया
मोहब्बत का मतलब
समझ गया
03-06-2012
559-79-05-12

Saturday, March 17, 2012

जो बनते हैं सहारा लोगों के

जो बनते हैं सहारा
लोगों के
हिम्मत होंसला बढाते हैं
रोते से हंसाते हैं उनको
बांटते हैं मुस्कान ज़माने को
उन्हें खुद का ख्याल नहीं
खुद अँधेरे कमरे में बैठे
सह रहे हैं
कैसे समझाए उन्हें कोई
अँधेरे को छोड़
उजाले में आ जाओ
कुछ अपना भी ख्याल करो
चाहने वालों को मायूस
ना करो
जिन्हें हंसाया था बड़ी
मुश्किल से
उन्हें फिर से ना रुलाओ
17-03-2012
391-125-03-12

Thursday, February 9, 2012

क्या ये ही काफी नहीं?

क्या फर्क पड़ता है ?
गर मेरे चेहरे पर  
तुम्हारा 
नाम नहीं पढता कोई
मेरे दिल में तुम्हारी 
तस्वीर नहीं देखता कोई
मेरे जहन में बसे तुम्हारे 
ख्याल को 
 समझता नहीं कोई
मेरी हर साँस से
जुडी तुम्हारी साँस का
अहसास किसी को नहीं
मेरे,तुम्हारे एक होने को
महसूस करता नहीं कोई
तुम मेरे लिए
मैं तुम्हारे लिए जीता हूँ
क्या ये ही काफी नहीं?
09-02-2012
129-40-02-12