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Sunday, June 3, 2012

कैसे कहूँ ?

कैसे कहूँ ?
तुम्हारे ख्याल भर से
दिल में कुछ होता है
हसरतें अंगडाई लेने
लगती
उम्मीदें मुंह उठाने
लगती
लफ्ज होठों की
दहलीज पर आ कर
रुक जाते हैं
ना सुनने के खौफ से
डर जाते हैं
मन की बात मन में ही
रह जाती है
हर लम्हा तडपाती है
कैसे कहूँ
तुम्हारे ख्याल भर से
क्या कुछ सहता हूँ
03-06-2012
560-80-05-12

Sunday, April 10, 2011

हम से खौफ खाना छोड़ दो

कभी तो
मन में ख्याल आता
होगा
दिल भी मन से 
पूछता होगा
किस बात से खौफ
खा गए?
क्या हमसे घबरा गए ?
बहम 
मन का निकालो
हमें 
खुद गर्ज़ ना समझो
तुम्हारी 
खुशी को अपनी समझा
तुम्हारे 
खातिर तनहा भी 
रह लेंगे
रिश्ते सारे तोड़ लेंगे
कोशिश मिलने की
ना करेंगे
निरंतर दुआ तुम्हारे
लिए करेंगे
अकेले ही जी लेंगे
बस बहम
मन से निकाल दो
हम से
खौफ खाना छोड़ दो
10-04-2011
645-78-04-11