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Thursday, March 14, 2013

ऐ दोस्त .....



ऐ दोस्त
हमारी छोटी सी खता को
तुमने दिल में उतार लिया
हमें दिल से ही निकाल दिया
हम दिल में तुम्हारे जैसी
तल्खी तो नहीं रखते
मलाल सिर्फ इस बात का है
तुमने ये भी नहीं बताया
 हमारी खता क्या है
इक बार हमारे दिल में
झाँक कर देखो
कमजोरियों के
चंद छोटे काँटों के अलावा
मोहब्बत के फूलों से भरा है
इंसानियत की महक से
महक रहा है
फिर भी तुम अगर
हमें गुनाहगार मानते हो
खुदा की रज़ा समझ
मंज़ूर कर लेंगे
ना आसूं बहायेंगे
ना नाराज़ होंगे
हँसते हँसते जीते रहेंगे
तुम्हारे दिल में पल रहे
नफरत के शज़र सूख जाएँ
मोहब्बत के फूल महक जाएँ
इंसान बन कर जी सको
तुम्हारे लिए खुदा से
दुआ करते रहेंगे
25-25-14-01-2013    
तल्खी,खता,शायरी,नज़्म,इंसानियत,मोहब्बत,दोस्त 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Wednesday, October 24, 2012

अगर ये खता है



बार बार कटघरे में
खडा किया गया
हर बार सज़ा के
काबिल पाया गया
हर बार सबने कहा
क्यों अपनों को
प्यार किया
क्यों लडखडातों को
खडा करने की कोशिश
करता रहा
अगर ये खता है
तो समझ नहीं आता
अपनों के चाहने की खता
कितनी सज़ा दिलाएंगी
अपनों की नासमझी
पता नहीं कहाँ ले जायेगी
इससे तो अच्छा है
खुद ही अलविदा कह दूं
उन्हें सुकून से रहने दूं
बची खुची ज़िन्दगी
मैं भी सुकून से काट लूं
784-27-24-10-2012
सुकून,ज़िन्दगी,खता,रिश्ते,अपने

Wednesday, July 6, 2011

हम करें तो तमाशा ,तुम करो तो अदा

हम करें तो तमाशा
तुम करो तो अदा
तुम वादा ना निभाओ
तो मजबूरी
हम से खता हो जाए
तो बेवफायी
हालात को अपनी
निगाहों से ना देखा करो
कुछ इमान का भी
ख्याल करा करो
निरंतर सच को सच 
झूठ को झूठ कहो
ऊपर से खुदा सब देखता
ये भी याद रखा करो
05-07-2011
1142-26-07-11