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Monday, September 19, 2011

हास्य कविता-नेताओं में अनशन फैशन हो गया(हास्य व्यंग्य)

नेताओं में अनशन
फैशन हो गया
हँसमुख जी के दोस्त
नेताजी अनशन पर
बैठ गए
हँसमुखजी को
दाल में काला लगा
भला नेता भूखा रह
सकता
फ़ौरन नेताजी से
सवाल पूछ लिया
तुम महीनों का माल
एक दिन में खा जाते हो
फिर भी पेट नहीं भरता
निरंतर दो चार दिन
बिना खाए कैसे रहोगे ?
नेताजी बोले अनशन
कौन कर रहा है
चार पांच दिन का
खा कर आया हूँ
बाकी रात में
विश्राम के समय
बाथ रूम में 
       जा कर खा लूंगा        
20-09-2011
1527-98-09-11

Tuesday, September 13, 2011

हास्य कविता-शिकारी खुद शिकार हो गए अपने ही जाल में फँस गए,


मशहूर नेताजी
सलाखों के पीछे पहुँच गए
शिकारी खुद शिकार हो गए
अपने ही जाल में फँस गए
लौमडीयों से मात खा गए
हर बात पर शेर कहते थे
खुद को सिंह कहते थे
पहले घर से निकाले गए
फिर दोस्त रुस्वां हो गए
शौक़ीन तबियत के थे
बॉलीवुड के आशिक थे
बातों के टेप आम थे
निरंतर आसमान पर थे
अब ज़मींदोज़ हो गए
सरकार बचाते,बचाते
खुद बेचारे हो गए
ना घर के रहे
ना घाट के रहे
आसमान से गिरे
खजूर में अटक गए
उनके किस्से अमर हो गए
चस्के ले ले कर सब सुन रहे
12-09-2011
1491-63-09-11
(हास्य व्यंग रचना है,व्यक्ति विशेष से ना जोडें ,
किसी के मान मर्दन या सम्मान को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी)

Monday, September 5, 2011

नेताजी के मरने की खबर अखबार में छपी

निरंतर
इमानदारी से
जीने वाले नेताजी
 के मरने की
खबर अखबार में छपी
मांगने वालों की भीड़
इकट्ठी हो गयी
जायदाद की तलाशी में
फूटी कौड़ी भी नहीं मिली
लोगों को समझ आ गया
नेताजी ने इमानदारी की
भारी कीमत चुकाई थी
उनकी बीबी भी
उन्हें छोड़ गयी थी
बच्चों ने अलग गृहस्थी
बसा ली थी
इमानदारी से
जीने के लिए परिवार से
विछोह औरउधारी
मजबूरी थी
05-09-2011
1453-25-09-11