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Tuesday, August 21, 2012

इमानदारी बकवास है



इमानदारी बकवास है
पैसा,सत्ता, ताकत ही
सब कुछ है
लूट खसोट करना
भ्रष्ट होना सबसे उत्तम  है
ना यह सत्य है
ना भावनाओं का
उबाल
ना मस्तिष्क की उपज
ना ही ह्रदय की आवाज़
ये केवल
मेरी आँखों ने जो देखा
मेरे कानों ने जो सुना
मेरे शहर में
फुटपाथ पर लेटे
भूख से मर रहे
एक गरीब असहाय ने
आंसू बहाते हुए
जो कहा उसका
वर्णन है
21-08-2012
662-22-08-12

Tuesday, July 24, 2012

मजबूर हूँ



खामोश रहे हैं
खामोश रहेंगे
जानते हैं
बिना जुबां खोले
हसरतें परवान नहीं
चढ़ सकतीं
हर बात इशारों से
नहीं कही जा सकती 
मजबूर हूँ
इमानदारी की फितरत
जुबान से
कुछ कहने नहीं देती
24-07-2012
617-14-07-12

Tuesday, June 5, 2012

खामोशी से सहना भी गुनाह होता



मुझे चोट लगी
मैं चुप रहा
मेरा दिल टूटा
मैंने कुछ नहीं कहा
मुझ पर पत्थर
फैंके गए
मैं हँसना रहा
मुझ पर इलज़ाम
लगाए गए
मैंने जवाब नहीं दिया
लोगों ने समझा
मैं गुनाहगार हूँ
पता नहीं था
खामोशी से सहना
भी गुनाह होता
इमानदारी से जीना
इतना दुश्वार होता
05-06-2012
570-20-06-12

Monday, April 2, 2012

ये कैसी चाहत है ?



तुम कहते हो
हमें बहुत चाहते हो
हर पल याद करते हो
ये कैसी चाहत है ?
हमारे चेहरे पर दर्द की
लकीरें
तुम ठहाके लगा रहे हो
हम चल भी नहीं  सकते
तुम दौड़ लगाते हो
क्यों खामखाँ
दोस्ती का नाम बदनाम
करते हो
इससे तो बेहतर था
तुम खुले आम हमें
दुश्मन कहते
दिल में  झूठ बोलने का
बोझ तो नहीं ढोते
अपने ज़मीर से तो
इमानदारी करते
02-04-2012
424-04-04-12

Sunday, January 15, 2012

ये चेहरा आज कुम्हलाया हुआ क्यूं है

ये चेहरा आज
कुम्हलाया हुआ क्यूं है
दिल किसने दुखाया
उसका पता क्या है
जा कर पूछूंगा उससे
उसके वहशीपन की
वजह क्या है
क्यूं उसे
खूबसूरत चेहरे
नहीं भाते
क्यूं इमानदारी से
जीने वाले उसे बुरे
लगते
क्यूं इतना बेदिल है
दिलदार उसे खारे
लगते
15-01-2012
44-44-01-12

Friday, January 6, 2012

उसूलों पर चलता हूँ


इमानदारी से जीता हूँ
झूठ नहीं बोलता हूँ
उसूलों पर चलता हूँ 
कुछ मुझे धरती से
जुडा हुआ कहते
एक अच्छा
इंसान समझते
कुछ मेरी
इमानदारी पर
शक करते
मेरे उसूलों को
ढकोसला कहते
मुझे परवाह नहीं
कौन क्या कहता ? 
मुझे तो जीवन यात्रा में
निरंतर परमात्मा के
उसूलों पर चलना है
इंसान बन कर जीना  है
अच्छा लगे या बुरा
किसी के कहने से
अपना सोच नहीं
बदलना है 
06-01-2012
16-16-01-12

Monday, September 5, 2011

नेताजी के मरने की खबर अखबार में छपी

निरंतर
इमानदारी से
जीने वाले नेताजी
 के मरने की
खबर अखबार में छपी
मांगने वालों की भीड़
इकट्ठी हो गयी
जायदाद की तलाशी में
फूटी कौड़ी भी नहीं मिली
लोगों को समझ आ गया
नेताजी ने इमानदारी की
भारी कीमत चुकाई थी
उनकी बीबी भी
उन्हें छोड़ गयी थी
बच्चों ने अलग गृहस्थी
बसा ली थी
इमानदारी से
जीने के लिए परिवार से
विछोह औरउधारी
मजबूरी थी
05-09-2011
1453-25-09-11

Tuesday, March 29, 2011

वर्तमान


मन में
दुखी हो रहा था
हालात  पर
चिंतन कर रहा था
तभी मित्र वर्तमान का
आना हुआ
आते ही परेशानी का
कारण पूछा
मैंने उन्हें बड़े भाई
सज्जन जी के बारे में
बताया
उनकी ख़ूबियों का
वर्णन किया
इमानदारी और सज्जनता के
किस्से सुनाए
अफसर उन से खुश नहीं
तरक्की भी कभी मिली नहीं
इस बात से व्यथित हूँ
मित्र बोला भाई निरंतर
आज कल कौन
इमानदारी और सज्जनता को
महत्त्व देता
वर्तमान में रहने को कहो
भ्रष्ट बनने को कहो
अफसर भी खुश होंगे
जेब नोट से भरेगी
तरक्की भी मिलेगी
प्रारम्भ में मन को
तकलीफ होगी
बाद में आदत
पड़ जायेगी  
29-03-03
538—208-03-11