मुझे चाहने वाले
चाहते हैं
उनकी खुशी के लिए
अपना वजूद ही खो दूं
मैं सोचता हूँ
क्यों ना खुद को ही
नेस्तनाबूद कर दूं
मेरी मौत का इलज़ाम
खुद पर ही लगा दूं
उन्हें तकलीफों से
बरी कर दूं
21-08-2012
667-27-08-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )