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Saturday, December 8, 2012

खामोशी से कभी दोस्ती मत करना



खामोशी से कभी
दोस्ती मत करना
खामोशी से
बच कर रहना
आहिस्ता आहिस्ता
दिल-ओ-दिमाग पर
कब्जा करती है
खामोशी से
खामोश कर देती है
कुछ करना ना करना
मगर खामोशी से
दूर रहना
916-34-08-12-2012
खामोशी

Tuesday, June 5, 2012

खामोशी से सहना भी गुनाह होता



मुझे चोट लगी
मैं चुप रहा
मेरा दिल टूटा
मैंने कुछ नहीं कहा
मुझ पर पत्थर
फैंके गए
मैं हँसना रहा
मुझ पर इलज़ाम
लगाए गए
मैंने जवाब नहीं दिया
लोगों ने समझा
मैं गुनाहगार हूँ
पता नहीं था
खामोशी से सहना
भी गुनाह होता
इमानदारी से जीना
इतना दुश्वार होता
05-06-2012
570-20-06-12

Thursday, May 10, 2012

दिन के उजाले पर रात की स्याही कैसी


हँसते हुए चेहरे पर आज ये उदासी कैसी

महकाती थी ज़माने को खुशबू जिनकी
आज उन बहारों में ये खिजा की बू कैसी

दिल डूबता है देख कर ये खौफ का मंज़र
शहनाइयों के बीच ये मातमी धुन कैसी

नहीं आ रहा समझ मुस्कुराते लबों पर
आज खुले आम ग़मों की नुमाइश कैसी

ना दे खुदा किसी हसीं को किस्मत ऐसी
मंदिर में हो जाए कब्रिस्तान की खामोशी

मासूम पर खुदा की ये मेहरबानियाँ कैसी 
ना मिले किसी दुश्मन को भी सज़ा ऐसी
10-05-2012
510-25-05-12


Sunday, March 4, 2012

आपकी खामोशी हमें कैसे भायेगी ?


बिना पानी के नदी
बिना कूक के कोयल
किस को अच्छी लगती ?
फिर आपकी खामोशी
हमें कैसे भायेगी ?
निरंतर हमारे दिल को
व्यथित करती
इक शूल सी चुभती
हर पल
मन प्रार्थना करता
परमात्मा
आपको खुशियों से
भर दे
फिर से आपके चेहरे पर
मुस्काराहट ला दे
आपका नूर आपको
लौटा दे
04-03-2012
289-24-03-12

Monday, January 2, 2012

आवाज़ देता हूँ

आवाज़ देता  हूँ
दिल से बुलाता हूँ
तुम आती नहीं हो
या तो पहुँचती नहीं
मेरी आवाज़ तुम तक
या मजबूर हो
ज़माने से डरती हो
घबराती हो
कहीं टूट ना जाए
दिल का रिश्ता हमारा
खामोशी से सहती हो
दिन रात तड़पती हो
खुद आकर ले जाऊं
निरंतर
इस इंतज़ार में
बैठी हो
02-01-2012
07-07-01-12

Tuesday, November 8, 2011

खामोशी निरंतर कहती मुझ से


 खामोशी
निरंतर कहती मुझ से
मुझे अपना साथी बना लो
अब सच कहना छोड़ दो
जो जैसा कर रहा
करने दो
जैसा हो रहा होने दो
ना किसी ने सुनी
ना अच्छी लगी किसी को 
हर बात
बेअसर रही अब तक
भलायी की चाहत में
बुरायी मिली
रिश्तों में दरार पड़ गयी
दोस्ती दुश्मनी में
बदल गयी
08-11-2011
1757-25-11-11

Thursday, October 20, 2011

दिल की दिल में रखते हैं



दिल की
दिल में रखते हैं
कुछ ना
किसी से कहते हैं
खामोशी से सहते हैं
मन में हँसते हैं
मन में रोते हैं
निरंतर खुद को
मशगूल रखते हैं
कोई अपना सा
मिल जाए
कुछ गुफ्तगू हो
जाए
दिल बहल जाए
दो पल हँस लें
कुछ लम्हों के लिए
ही सही 
ग़मों को भूल जाएँ
अंधेरी ज़िन्दगी में
थोड़ी सी
चमक आ जाए
कोशिश में लगे
रहते हैं
19-10-2011
1674-82-10-11

Tuesday, September 27, 2011

हमने सही है तकलीफें दिल के खातिर कई

हमने सही है
तकलीफें
दिल के खातिर कई
खामोशी में
बिताए दिन कई
ग़मज़दा
लगी चांदनी रातें
रो रो कर काटी
रातें कई
लुटी हैं हसरतें
बार बार
ना बना हमसफ़र
अब तक कोई
फाड़ दिए ख़त
बार बार कई
निरंतर बेवफायी
 अब आदत हो गयी
27-09-2011
1572-1403-,09-11

Wednesday, September 14, 2011

लोग जहर उगलते रहे ,हम खुशी से निगलते रहे

जब भी मुस्कराए
किसी की नज़र के
शिकार हो गए
दो कदम आगे बढाए
जालिमों ने कांटे
बिछा दिए
हम खामोशी से
बैठ गए
लोगों ने मसले खड़े
कर दिए
लोग जहर उगलते रहे
हम खुशी से निगलते रहे
निरंतर नफरत से
लड़ते लड़ते
हम हँसना भूल गए
जीने की चाहत में
हम फिर भी ना रोए
हिम्मत से सहते रहे
धीरे धीरे चलते रहे
उनकी तंगदिली पर
हँसते रहे
14-09-2011
1504-76-09-11

Tuesday, August 16, 2011

हसरतें दिल में दबा कर रखता हूँ

कभी

मैं भी चहकता था

खुल कर बहकता था

निरंतर पंछी सा

उड़ता था

अब कायदे के

पिंजरे में बंद हूँ

कम बोलता हूँ

खामोशी से सहता हूँ

हसरतें दिल में

दबा कर रखता हूँ

लाचारी से देखता हूँ

यादों के सहारे

जीता हूँ

16-08-2011

1367-89-08-11

Sunday, July 31, 2011

ना रोता हूँ, ना तड़पता हूँ

ना रोता हूँ

ना तड़पता हूँ

खामोश रहता हूँ

खुशी से सहता हूँ

खुदा से दुआ करता हूँ

उन्हें उनकी

इंसानियत लौटा दे

निरंतर सुकून से रहना

सिखा दे

नफरत से निजात

दिला दे

खुद खुशी से जिएँ

औरों को भी जीने दें

31-07-2011

1278-162-07-11

Saturday, July 9, 2011

जैसे भी होगा जीते रहेंगे

हालात को मंज़ूर
कर लिया
अब रास्ता ये ही
चुन लिया
खामोशी से सब 
देखते रहेंगे
चुपचाप सहते रहेंगे
ना प्रतिरोध करेंगे
ना विरोध की 
बात करेंगे
दिए की मंद हुयी
रोशनी को
बुझने ना देंगे
कम में संतोष करेंगे
निरंतर हँसते रहेंगे
जैसे भी होगा जीते
रहेंगे
09-07-2011
1158-42-07-11