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Monday, December 12, 2011

दहशत ने शक दिल में बसा दिया


मैंने समझा
तुम भी ग़मज़दा हो
मेरी तरह
तुम्हें भी कोई साथ
चाहिए
अंदाज़ मेरा गलत
निकला
तुम ग़मज़दा भी हो
खौफज़दा भी हो
लगता है
खूब भुगता है तुमने
लोगों की फितरत  को  
नतीजतन दोस्ती की
इल्तजा को ठुकरा दिया
बेदिलों  की भीड़ में
मुझे भी
शामिल कर दिया
बेगुनाह को गुनाहगार
करार दे दिया
दहशत ने शक 
दिल में बसा दिया 
12-12-2011
1856-24-12

Tuesday, September 27, 2011

हमने सही है तकलीफें दिल के खातिर कई

हमने सही है
तकलीफें
दिल के खातिर कई
खामोशी में
बिताए दिन कई
ग़मज़दा
लगी चांदनी रातें
रो रो कर काटी
रातें कई
लुटी हैं हसरतें
बार बार
ना बना हमसफ़र
अब तक कोई
फाड़ दिए ख़त
बार बार कई
निरंतर बेवफायी
 अब आदत हो गयी
27-09-2011
1572-1403-,09-11