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Thursday, March 15, 2012

ये कैसा साथ निभाते हो तुम

बार बार हमारे
करीब आते हो तुम
हर बार मिल कर
बिछड़ जाते हो तुम
ना तुम हमें जानते
ना हम तुम्हें जानते
फिर भी बार बार
क्यों मिलते हैं हम
खुद भी सज़ा पाते हो
हमें भी
सजा देते हो तुम
ये कैसा साथ
निभाते हो तुम
15-03-2012
373-107-03-12

Monday, October 3, 2011

जब भी कोई नया मिलता

जब भी
कोई नया मिलता
बहुत कम दिल
को भाता
जो भी दिल को भाता
मन को भी लुभाता
अपनेपन का अहसास
कराता
जहन में अजीब सा
ज़लज़ला मचता
फिर मिलने की चाहत
बढाता
दिल से दिल
मन से मन मिले
ना भूले कभी
ना बिछड़े कभी
मन निरंतर नज़दीकी
चाहता
परमात्मा से दुआ
उसकी खुशी और
सलामती की करता
रोज़ उसका इंतज़ार
रहता  
01-10-2011
1595-04-10-11

पहली बार मिले

पहली बार मिले
रंग बिरंगे
सपने उड़ान भरने लगे
मन के सूने आकाश में
परिंदे फडफडाने लगे
ह्रदय में प्रेम संगीत के
नए सुर सजने लगे
संबंधों को विचारों से
आगे बढाने लगे
हवाई किले बनाने से
पहले
उनसे भी तो पूछ लो
वो क्या चाहते हैं ?
निरंतर ,मुस्काराने को
प्रेम क्यों समझते हो
01-10-2011
1593-02-10-11

Saturday, October 1, 2011

पहली बार मिले

पहली बार मिले
रंग बिरंगे
सपने उड़ान भरने लगे
मन के सूने आकाश में
परिंदे फडफडाने लगे
ह्रदय में प्रेम संगीत के
नए सुर सजने लगे
संबंधों को विचारों से
आगे बढाने लगे
हवाई किले बनाने से
पहले
उनसे भी तो पूछ लो
वो क्या चाहते हैं ?
निरंतर ,मुस्काराने को
प्रेम क्यों समझते हो
01-10-2011
1593-02-10-11

Sunday, July 31, 2011

मेरे अनजाने ब्लॉगर दोस्त

जिन्हें जानता

जो रोज़ मिलते

ऊपर से खुश दिखते

अन्दर से बद्दुआ देते

मेरे अनजाने ब्लॉगर

दोस्त उनसे अच्छे

जिन्हें कभी देखा नहीं

जो कभी मिले नहीं

वो मेरा मैं उनका

होंसला बढाते

जो मैं लिखता

वो पढ़ते

जो वो लिखते,

मैं पढता

वो दाद देते ,

मैं भी दाद देता

उनसे मिलने की

इच्छा रखता

देखने को दिल चाहता

उनका भी सोच

ऐसा ही होगा

इस उम्मीद में निरंतर

लिखता रहता

31-07-2011

1274-158-07-11