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Saturday, December 8, 2012

तुमने कहा मुझे नहीं भाया



तुमने कहा
मुझे नहीं भाया
मैं नासमझ
तुम समझदार हुए
मैंने कहा
तुम्हें नहीं भाया
मैं समझदार
तुम नासमझ हुए
अहम् टकराता रहा
नतीजा कुछ नहीं
निकला
921-39-08-12-2012
नासमझ,समझदार,अहम्

Tuesday, March 13, 2012

हम हार क्या गए

हम हार क्या गए
अब रोज़ आते हैं
दिल को दुखाने वाले
गलतियां निकालने वाले
क्या करना चाहिए था ?
क्या नहीं करना
चाहिए था ?
समझाने वाले
जब तक जीतते थे हर
 लड़ायी
हम से  बेहतर नहीं
होता था कोई
अब हम नासमझ
हो गए
पीछे पीछे चलने वाले
सब समझदार हो गए
हमें अपनी असलियत
बता गए
13-03-2012
364-98-03-12

Tuesday, March 6, 2012

कौन सुनता है किसी की ?जो तुम मेरी सुनोगे

कौन सुनता है
किसी की ?
जो तुम मेरी सुनोगे
बहुत जिद करूंगा
तो दो चार मिनिट
सुन लोगे
आगे बढूंगा उससे पहले
मुझे टोक दोगे
पूरी बात
सुने समझे बिना
सलाह दे दोगे
आधी गलती मेरी
आधी
 दूसरे की बता दोगे  
सब्र से काम
लेने के लिए कहोगे
मिलजुल कर रहने का
फैसला सुना दोगे
तुमने हाँ में हाँ नहीं
मिलायी
इसलिए मुझे संतुष्टी नहीं
मिलेगी
मैं किसी ऐसे को ढूदूंगा
जो मेरी हाँ में हाँ मिला दे
मेरी इच्छा के अनुरूप
फैसला सुना दे
दुनिया के सामने उसे
समझदार
तुम्हें मूर्ख बताऊंगा
06-03-2012
304-38-03-12