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Saturday, December 15, 2012

सब कुछ समझ कर भी नासमझ बनता रहा



सब कुछ समझ कर भी
नासमझ बनता रहा
सच को झूठ
झूठ को सच कहता रहा
रिश्तों को निभाने के खातिर
दुश्मनों को दोस्त कहता रहा
काले चेहरों को
पहचान कर भी सफेद
कहता रहा
खुद को ही धोखा देता रहा
964-83-15-12-2012
रिश्ते,ज़िन्दगी ,दुश्मन,दोस्त,समझ,नासमझ,

Saturday, December 8, 2012

तुमने कहा मुझे नहीं भाया



तुमने कहा
मुझे नहीं भाया
मैं नासमझ
तुम समझदार हुए
मैंने कहा
तुम्हें नहीं भाया
मैं समझदार
तुम नासमझ हुए
अहम् टकराता रहा
नतीजा कुछ नहीं
निकला
921-39-08-12-2012
नासमझ,समझदार,अहम्

Tuesday, March 13, 2012

हम हार क्या गए

हम हार क्या गए
अब रोज़ आते हैं
दिल को दुखाने वाले
गलतियां निकालने वाले
क्या करना चाहिए था ?
क्या नहीं करना
चाहिए था ?
समझाने वाले
जब तक जीतते थे हर
 लड़ायी
हम से  बेहतर नहीं
होता था कोई
अब हम नासमझ
हो गए
पीछे पीछे चलने वाले
सब समझदार हो गए
हमें अपनी असलियत
बता गए
13-03-2012
364-98-03-12