Showing posts with label समझ. Show all posts
Showing posts with label समझ. Show all posts

Tuesday, March 26, 2013

अब समझ भी लेंगे तो क्या फर्क पडेगा



जब ज़िन्दगी भर
नहीं समझ सके मुझ को
अब समझ भी लेंगे
तो क्या फर्क पडेगा
ज़िन्दगी भर
रोने सहने के बाद
ना मन खुश होगा
ना चेहरे पर हँसी आयेगी
उनकी नाराजगी का डर
इस हद तक बैठ चुका है
मन में
मुझे खुश देख कर
कहीं नाराजगी नहीं
बढ़ जाए उनकी
48-48-26-01-2013
ज़िन्दगी,नाराजगी,समझ ,ना समझ,खुशी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, December 15, 2012

सब कुछ समझ कर भी नासमझ बनता रहा



सब कुछ समझ कर भी
नासमझ बनता रहा
सच को झूठ
झूठ को सच कहता रहा
रिश्तों को निभाने के खातिर
दुश्मनों को दोस्त कहता रहा
काले चेहरों को
पहचान कर भी सफेद
कहता रहा
खुद को ही धोखा देता रहा
964-83-15-12-2012
रिश्ते,ज़िन्दगी ,दुश्मन,दोस्त,समझ,नासमझ,