Showing posts with label दुश्मन. Show all posts
Showing posts with label दुश्मन. Show all posts

Saturday, December 15, 2012

सब कुछ समझ कर भी नासमझ बनता रहा



सब कुछ समझ कर भी
नासमझ बनता रहा
सच को झूठ
झूठ को सच कहता रहा
रिश्तों को निभाने के खातिर
दुश्मनों को दोस्त कहता रहा
काले चेहरों को
पहचान कर भी सफेद
कहता रहा
खुद को ही धोखा देता रहा
964-83-15-12-2012
रिश्ते,ज़िन्दगी ,दुश्मन,दोस्त,समझ,नासमझ,

खुद्दारी दुश्मन बन गयी



लोगों के तीरों से
बचने की जितनी भी
कोशिश करी
उतने ही ज़ख्म खाता रहा  
सीधी चाल चलने की
कोशिश करी
टेढ़ी चालों से
जवाब मिलता रहा
हँसने की कोशिश में
निरंतर रोना पडा
कभी रोशनी की किरण
नज़र भी आयी
उजाला देखने से पहले ही
अँधेरे से पाला पडा
खुद्दारी दुश्मन बन गयी
दवा की जगह हमेशा
ज़हर मिलता रहा
942-61-15-12-2012
खुद्दारी,दुश्मन

Tuesday, December 11, 2012

बड़ा हूनर चाहिए



बड़ा हूनर चाहिए
दोस्त को दुश्मन
समझने में
हाथ में खंजर
चेहरे पर हँसी रखने में
मैं हूनर मंद नहीं हूँ
दोस्त को
दोस्त समझता हूँ
दोस्त के
रोने पर रोता हूँ
दोस्त के
हँसने पर हँसता हूँ
932-51-12-12-2012
शायरी,दोस्त,दुश्मन, हूनर

Wednesday, December 5, 2012

हो सके तो मुझे माफ़ कर देना



हो सके तो
मुझे माफ़ कर देना
माफ़ ना कर सको तो
बद्दुआ  मत देना
बद्दुआ भी दो तो
मेरा नाम मत भूलना
नाम भी भूल जाओ तो
जो कहता हूँ
उसे याद रखना
दुश्मन को
दोस्त बना लाना
कभी दोस्त को
दुश्मन मत बनाना
मुझ से तो
नफरत कर ली तुमने
किसी और से
नफरत मत करना
896-14-05-12-2012
दोस्त,दुश्मन,दोस्ती,माफी, नफरत

Sunday, November 11, 2012

कैसे जानूं मैं



कौन दोस्त कौन दुश्मन
कैसे जानूं मैं
जो हँस के मिले उसे दोस्त
जो ना हँसे
क्या उसे दुश्मन मान लूं
जो रहे गंभीर
ज़ाहिर ना कर पाए
मगर चाहे दिल से
क्या उस पर ज़ुल्म करूँ
या जो चेहरे पर चेहरा
चढ़ाए
जेब में खंजर छुपाये
हँस कर गले मिले
उससे गले मिलूँ
दुश्मन को दोस्त समझ लूं
ज़माने की चाल चलूँ
841-25-11-11-2012
दुश्मन,दोस्त,शायरी,  

Tuesday, October 16, 2012

हम लीक से हट कर चलते रहे


हम लीक से
हट कर चलते रहे
लोग काफिर समझते रहे
हम प्यार से गले
लगाते रहे
लोग दुश्मन समझ कर
पीछा छुडाते रहे
 हम भी आदत से ढीठ थे
नए दोस्त बनाते रहे
773-18-16-10-2012
दोस्त,दुश्मन 

Sunday, September 2, 2012

मिला था अनजान बन कर



मिला था
अनजान बन कर
छा गया था दिल पर
बहार बन कर
चेहरे पर चेहरा
चढ़ा कर आया था
छुपा कर
खिजा साथ लाया था
दोस्त के भेष में
दुश्मन निकला
मोहब्बत का सिला
ऐसा दिया
ना जीने दिया ना
मरने दिया
कातिल बन कर
साथ निभाता रहा
02-09-2012
712-09-09-12

Monday, May 28, 2012

हम उन्हें दोस्त समझते रहे



हम उन्हें
दोस्त समझते रहे
वो हमें
दुश्मन मानते रहे
वो ज़ख्म देते रहे
हम खामोशी से
खाते रहे
28-05-2012
540-60-05-12

Tuesday, March 20, 2012

शुक्रगुजार हूँ


शुक्रगुजार हूँ 
जो इतने ज़ख्म
तुमने मुझे दिए
उन्हें देख कर
तुम्हें याद 
तो करता ही हूँ
अहसास भी करता हूँ
कोई अपना ही था
कोई दुश्मन 
होता तो बर्दाश्त
 नहीं करता
आपा खो देता
मुंह तोड़ कर
जवाब दे देता
20-03-2012
418-152-03-12

Friday, August 5, 2011

कभी मेहमान बना कर बुलाया गया

कभी मेहमान

बना कर बुलाया गया

गले से लगाया गया

जी भर के हंसाया गया

आज दुश्मन समझ

निकाला गया

जी भर कर रुलाया गया

धोखा खाता गया

बार बार दुत्कारा गया

निरंतर

तसव्वुर करता रहा

दिल लगाता रहा

उम्मीद में जीता रहा

05-08-2011

1305-27-08-11

Wednesday, July 27, 2011

ना वो रहेंगे ,ना रहने देंगे

ना वो रहेंगे
ना रहने देंगे
नफरत में जीते रहेंगे
आंतक से अमन चैन
भंग करेंगे

बेगुनाहों की जान लेंगे
मोहब्बत से किसी को
रहने ना देंगे
हैवानियत
उनके मन में बसी
किसी हाल में
वो ना बदलेंगे
निरंतर उन्हें ढूंढना
पर्दाफ़ाश कर हवाले
क़ानून के करना
हो अब मकसद

हमारा
देश में पल रहे
दुश्मनों को
नेस्तनाबूद करना
हर देशभक्त का हो
अब सपना

27-07-2011

1240-120-07-11

Tuesday, June 7, 2011

दोस्त और दुश्मन में फर्क समझा गए

पहले अपने तो
अपने होते थे 
अब अपने भी पराये   
हो गए
कभी हम नफ़स थे
निरंतर
साथ हँसते,गाते थे
हर नाज़ उठाते थे
हर गम में सहारा थे 
पहले दर्द-ऐ दवा
होते थे
अब दर्द-ऐ-दिल
हो गए
दोस्त और दुश्मन में
फर्क समझा गए
07-06-2011
1018-45-06-11