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Friday, August 5, 2011

कभी मेहमान बना कर बुलाया गया

कभी मेहमान

बना कर बुलाया गया

गले से लगाया गया

जी भर के हंसाया गया

आज दुश्मन समझ

निकाला गया

जी भर कर रुलाया गया

धोखा खाता गया

बार बार दुत्कारा गया

निरंतर

तसव्वुर करता रहा

दिल लगाता रहा

उम्मीद में जीता रहा

05-08-2011

1305-27-08-11

Sunday, June 12, 2011

मन की खिड़की,दिल का दरवाज़ा खुला रखता हूँ

मन की खिड़की
दिल का दरवाज़ा खुला
रखता हूँ
मेहमानों का निरंतर
इंतज़ार करता हूँ
सब्र नहीं खोता
किस जात,
किस रंग का होगा ?
कब आयेगा ?
नहीं सोचता
दिल के सौदे में कोई
मोल भाव नहीं करता
हर आने वाले का
इस्तकबाल करता हूँ
दिल मिले 
जब तक रखता हूँ
ना मिले तो प्यार से
विदा करता हूँ
ना मलाल करता
ना रंज कोई रखता
नए मेहमान से
मिलने का अरमान
कभी ख़त्म नहीं होता
उम्मीद में
वक़्त गुजारता हूँ
11-06-2011
1033-60-06-11