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Monday, March 18, 2013

अगर मैं तुम्हें समझना चाहूँ



अगर मैं
तुम्हें समझना चाहूँ
तो मुझे भी
तुम्हारे जैसे सोचना होगा
तुम मुझे समझना चाहो तो
तुम्हें भी
मेरे जैसे ही सोचना होगा
पर यह आसान नहीं होगा
हमें
अहम् को छोड़ना होगा
एक दूसरे की स्थिति,
परिस्थिति का ध्यान
रखना होगा
स्वयं को दूसरे के स्थान पर
रख कर सोचना होगा
तभी हम एक दूसरे को
समझ पायेंगे
नहीं तो स्वयं को सही
दूसरे को गलत कहते रहेंगे
35-35-18-01-2013
सम्बन्ध,रिश्ते,समझना ,अहम्
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Tuesday, August 21, 2012

कहना कुछ और चाहता हूँ ,समझा कुछ और जाता है



हमारी हर बात में
शायद एक हर्फ़
कम रह जाता है
बात का मतलब ही
बदल जाता है
तकलीफ का सबब
बन जाता है
कैसे समझाऊँ ?
खुद को बेगुनाह बताऊँ
कहना कुछ और
चाहता हूँ
समझा कुछ और
जाता है
21-08-2012
682-42-08-12