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Saturday, July 9, 2011

कृष्ण और कंस का युग लौट आया

कृष्ण और कंस का
युग लौट आया
घर घर में
महाभारत हो रहा  
भांजा मामा को
मामा,भांजे को मारने
दौड़ रहा
बहन भाई के लिए
 बद्दुआ कर रही
बेटे के हाथों उसकी मौत 
मांग रही
भाई,बहन को पुत्रविहीन 
करने को आतुर
अपनों को अपने मार रहे
निरंतर
खून के प्यासे हो रहे
मनों में जहर घुल गए
इर्ष्या,द्वेष से सब जी रहे
कुटिल चालें चल रहे
दिखाने को हंस रहे
09-07-2011
1161-45-07-11

Wednesday, June 29, 2011

कुटिल भीड़ बनाते ,किसी पार्टी का नाम देते

आज तक
समझ ना सका
क्यों लोग भीड़ की
तरफ भागते ?
वही करते जैसा सब
करते
अच्छे बुरे से सारोकार
ना रखते
विवेक,अनुभव को
महत्त्व ना देते
भीड़ पैमाना उनका
कुटिल भीड़ बनाते
किसी पार्टी का नाम देते
भोले निरंतर जाल में
फसते
प्रजातंत्र में उसे
जनता और चुनाव
कहते
कुटिल लुभावने वादे
करते
साम दंड भेद से चुनाव
जीतते
सरकार बनाते
भोले निरंतर रोते
रहते
29-06-2011
1111-138-06-11