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Sunday, March 3, 2013

गरीब बेचारा गरीब रह गया



आंकड़ों के
मकड़ जाल में सारा देश
उलझ गया
गरीब बेचारा गरीब रह गया
मुद्रास्फीति,महंगाई दर ,
रोज़ कितने पैसों में
गरीब का घर चलता
इस जोड़ बाकी में
गरीब बेचारा पिस गया
वातानुकूलित कमरों में बैठे
अर्थशास्त्रियों की ज़द्दोज़हद में
गरीब बेचारा उलझ गया
उसे क्या लेना देना
क्या बड़ा क्या घटा
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में
थक चुका आंकड़ों के जाल से
उसके तो पेट की भूख
मिटनी चाहिए
पीने को स्वच्छ पानी
सर पर छत होनी चाहिए
बच्चों को शिक्षा,स्वस्थ शरीर
क़ानून का राज़ चाहिए
दर बड़े या घटे
नेता झूठ बोले या सच
उसे कोई मतलब नहीं
उसे तो बस आराम की
नींद आनी चाहिए
07-07-03-01-2013
देश,सरकार,राज,गरीब,जनता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Wednesday, June 29, 2011

पार्टियां बदलती, चेहरे बदलते ,सरकार वैसी ही रहती

चुनाव के नाम पर
चेहरे पर मुस्कान आती
पांच साल बाद राहत
मिलेगी
जनता को आशा की
नयी किरण दिखती
वादे वही होते
पार्टियां बदलती
चेहरे बदलते
सरकार वैसी ही रहती
जनता की हालत
बद से बदतर होती
समस्याएं बढ़ती रहती
जनता ठगी सी महसूस
करती
निरंतर आंसू बहाती
रहती
कब पांच साल बीतेंगे
सरकार बदलेगी
उम्मीद में जीते
रहते 
29-06-2011
1112-139-06-11

कुटिल भीड़ बनाते ,किसी पार्टी का नाम देते

आज तक
समझ ना सका
क्यों लोग भीड़ की
तरफ भागते ?
वही करते जैसा सब
करते
अच्छे बुरे से सारोकार
ना रखते
विवेक,अनुभव को
महत्त्व ना देते
भीड़ पैमाना उनका
कुटिल भीड़ बनाते
किसी पार्टी का नाम देते
भोले निरंतर जाल में
फसते
प्रजातंत्र में उसे
जनता और चुनाव
कहते
कुटिल लुभावने वादे
करते
साम दंड भेद से चुनाव
जीतते
सरकार बनाते
भोले निरंतर रोते
रहते
29-06-2011
1111-138-06-11

Monday, June 6, 2011

इस मुल्क का क्या होगा ?

जहाँ निहत्थों को लाठी
अलगाववादियों  को सुरक्षा
मिलेगी
जनता का पैसा,भ्रष्टाचारियों द्वारा
विदेशों बैंकों में छुपा कर रखा जाएगा
देश का किसान आत्महत्या करता रहेगा
इस मुल्क का क्या होगा ?
जहाँ सरकार भ्रष्टाचारियों को
बचाती रहेगी
सत्ता के लिए आंतकवादियों को
फांसी की सज़ा से बचाती रहेगी
घर जाकर मिजाजपुर्सी होती रहेगी 
इस मुल्क का क्या होगा ?
जहाँ शहीदों की विधवाएं रोती रहेगी
 शहीदों के नाम पर राजनीती होती रहेगी
नेताओं की मूर्तियाँ लगती रहेगी
इस मुल्क का क्या होगा ?
जहाँ धर्म,भाषा,जात,पांत के नाम पर
नेताओं की कारगुजारियां चलती रहेगी
जनता को निरंतर
झूठी दिलासा मिलती रहेगी
इस मुल्क का क्या होगा ?
जहाँ भूखी जनता,भूखी रहेगी
महंगाई और भ्रष्टाचार से त्रस्त रहेगी
नेताओं के जाल में फंसती रहेगी
06-06-2011
1008-35-06-11

Sunday, June 5, 2011

मेरे अपने देश में सरकार के डंडे से घबरा रहा

डर से सहम रहा 
मेरे अपने देश में
सरकार के डंडे से 
घबरा रहा
क्या कहूं ?किसे कहूं ?
कैसे कहूं ?
निरंतर सोच रहा
क्या पता कौन सी बात ?
राज करने वालों को
नहीं भायेगी
चुप कराने की
साज़िश होगी
मेरे ऊपर भी लाठी
चलेगी
अब मैंने भी आँखें
खोल ली
लड़ने की ठान ली
लाठी गोली खा लूंगा
चुप नहीं बैठूंगा
भ्रष्टाचार से लडूंगा
निरंतर बात अपनी
कहूंगा
भारत को भ्रष्टाचार मुक्त
करने की लड़ाई में
तन मन धन से
सहयोग दूंगा 
05-06-2011
1005-32-06-11

Sunday, March 27, 2011

जनता की सरकार जीत गयी,जनता हार गयी



बाप दादाओं से विरासत में
मिली ज़मीन के छोटे से टुकड़े पर
खेती करता था
किसी तरह परिवार का 
भरण पोषण करता
आज सरकारी कागज़ मिला
नयी सड़क बनेगी, 
ज़मीन सरकार को देनी होगी
मुआवजे की राशी मिलेगी,
 खेती बंद करनी पड़ेगी
खेती बंद हुयी मुश्कलें बढ़ी 
छोटा मोटा काम कर के भी
आवश्यकता पूरी नहीं होती
मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तर के
चक्कर लगाते लगाते
चप्पलें घिस गयी कमर टूट गयी
गाँठ का पैसा भी बाबुओं को देते देते ,
चाय पानी पिलाते पिलाते ख़त्म हो गया
जी हजूरी करनी पड़ती सो अलग
पूरा दिन व्यर्थ हो जाता
जो चार पैसे कमाता, 
उस से भी हाथ धोता
एक पैसा मिलने से पहले , 
बीमारी ने जकड लिया
उम्मीद कम होती गयी, 
निराशा ने घर कर लिया
कागजों में निरंतर
नयी कमी बता दी जाती
रोटी के लाले पड़ने लगे
छ बच्चों का परिवार 
पालना असंभव हो गया
भीख मांगने की नौबत आ गयी
अवसाद में जीने लगा
एक दिन कुए में कूद जान दे दी
उसकी अर्थी निकल गयी
सरकारी दफ्तरों के 
चक्कर से मुक्ती मिल गयी
सरकारी फ़ाइल चलती रही
नयी सड़क बन गयी
जनता की सरकार जीत गयी
जनता हार गयी
27-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
519—189-03-11