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Thursday, December 20, 2012

देश में अज़ब तमाशा हो गया है



देश में अज़ब तमाशा हो गया है
प्रजातंत्र का सत्यानाश हो गया है
देश नेताओं की भेंट चढ़ गया है
नेता का बेटा भी नेता हो गया है
रातों रात अमीरों को बाप हो गया
बिना पैंदे का नेता तो बना ही
बिना धंधे का धंधेबाज़ हो गया है
पढ़ा चाहे चार क्लास भी नहीं हो
पढने वालों से आगे निकल गया है
बेकार से अब काम का हो गया है
गरीब बेचारा गरीब ही रह गया है
पहले भी भूख से मरता रहा है
अब भी भूख से मर रहा है
देश में अज़ब तमाशा हो गया है
974-93-20-12-2012
देश,भ्रष्टाचार,नेता, प्रजातंत्र

Wednesday, May 30, 2012

हम खुश किस्मत हैं,हमें गाँधी,सुभाष मिले

हम खुश किस्मत हैं
हमें गाँधी,सुभाष मिले
पटेल,शास्त्री भी मिले
हम आज़ाद भी हुए
हमें गणतंत्र मिला,
प्रजातंत्र भी मिला
फिर इतने बदकिस्मत
कैसे हो गए
भ्रष्ट और स्वार्थी
नेताओं का राज मिला
ऊपर जाऊंगा तब
इश्वर से पूछूंगा ज़रूर
ये अंग्रेजों की
बद्दुआ का असर है
या फिर
हमारे कर्मों का
फल है
30-05-2012
547-67-05-12


Saturday, May 12, 2012

कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते

कौन कहता है
ऊंचे पहाड़ों पर घास के
मैदान नहीं होते
ऊंचे लोग धरातल से
जुड़े नहीं होते
हुए हैं इस देश में नेता
गाँधी,सुभाष पटेल
जैसे भी
ना अहम् था,ना स्वार्थ था
ना ही खुद का ध्यान था
जीवित रहे जब तक
सोचते रहे देशवासियों के
भले के लिए
जिए जब तक जिए
देश और देशवासियों
के लिए
क्रतव्य की बलि वेदी पर
करी जान न्योछावर
देश और देशवासियों
के लिए
12-05-2012
512-26-05-12


Thursday, May 10, 2012

हमें तो पता नहीं भैया, तुम्हें पता हो तो बता दो


क्या होती है राजनीति ?
कैसे चलते हैं चालें?
हमें तो पता नहीं भैया
तुम्हें पता हो तो बता दो
कैसे करते हैं घोटाला ?
कैसे लेते हैं रिश्वत ?
हमें तो पता नहीं भैया
तुम्हें पता हो तो बता दो
कैसे करवाते हैं दंगे?
कैसे होती है हड़ताल ?
हमें तो पता नहीं भैया
तुम्हें पता हो तो बता दो
कैसे करते हैं झूठ को सच ?
कैसे करते हैं काले को सफ़ेद ?
हमें तो पता नहीं भैया
तुम्हें पता हो तो बता दो
कैसे रखते हैं बोरियों में पैसे ?
कैसे भेजते हैं विदेश?
हमें तो पता नहीं भैया
तुम्हें पता हो तो बता दो
क्यों करते हो दिमाग खराब ?
क्यों हम से पूछ रहे हो ?
पूछना है तो
किसी नेता से पूछ लो
वो ही करता है सब
वही बताएगा सच ?
10-05-2012
507-22-05-12



Thursday, December 29, 2011

हास्य कविता-मैं नहीं कहता,तुम पैसे मत खाओ ( व्यंग्य)


मैं नहीं कहता
तुम पैसे मत खाओ
तुम पैसे तो खाओ
पर इतने तो मत खाओ
पचा भी ना सको
अपच से
बीमार पड़ जाओ
खाना है तो
ऊँट के मुंह में जीरे
जितना खाओ
तुम तो इंसान हो
हाथी के चारे जितना
खा जाते हो
मैं कतई नहीं कहता
तुम झूठ मत बोलो
तुम झूठ तो बोलो
पर इतना तो मत बोलो
बोलने से पहले ही
पकडे जाओ
जनता का विश्वास ही
खो दो
मैं बिलकुल नहीं कहता
तुम घोटाले मत करो
तुम घोटाले तो करो
पर इतने तो मत करो
गरीब का अनाज ही
खा जाओ
गरीब भूख से मर जाए
सड़क दिखे ही नहीं
पुल छ महीने में गिर जाए
निर्दोष मारे जाएँ
मेरे देश के नेताओं
राजनीति तो करो
पर ऐसी तो मत करो
लोग तुमसे
नफरत करने लगें
तुम्हें चोर,डाकू समझने लगें
तुम्हारा नाम सुनते ही
मुंह से अपशब्द निकलें
मैं नहीं कहता
तुम किसी से डरो
पर कम से कम
भगवान् से तो डरो
गरीब की बद्दुआ मत लो 
ऊपर जा कर
क्या जवाब दोगे ?
यह भी तो सोचो
आम आदमी निरंतर
विनती करता रहा तुमसे
इन्सान हो
कम से कम इंसान सा
व्यवहार तो करो
अब यह भी समझ लो
आम आदमी चुप नहीं
बैठेगा
अपने को सुधार लो
प्रजा को राजा मान लो

29-12-2011
1900-68-12

Tuesday, December 27, 2011

हम स्वतंत्र हैं ,ये प्रजातंत्र है


हर 
चेहरे पर व्यथा
हर ह्रदय में दुःख
हर मन व्यथित
भयावह स्थिती है
महंगाई से जनता
त्रस्त है
देश भ्रष्टाचार की
बीमारी से ग्रसित है
नेता मस्त हैं
हम स्वतंत्र हैं
ये प्रजातंत्र है
गरीब
उसका मतदाता
भूख
उसका आभूषण
रोना उसकी आदत
काम जैसा भी मिले
जितना भी मिले
मिले ना मिले
उसे तो जीना है
लुभावने वादों के
प्रलोभन में
फंसना है
हर पांच साल में
मत देना है
फिर से नेताओं को
जिताना है
प्रजातंत्र को
ज़िंदा रखना
उसका कर्तव्य है
स्वतंत्र होने का
साक्ष्य देना है
फिर पांच साल
रोना है
27-12-2011
1894-62-12

Friday, December 16, 2011

हास्य कविता-हँसमुख जी का फैसला


मोहल्ले में रामू श्यामू को
को लड़ते देख
हँसमुखजी से रहा ना गया
फ़ौरन बीच
बचाव करने के लिए
पहुँच गए
झगडे का कारण पूछने लगे
रामू बोला
श्यामू ने मुझे नेता कहा
श्यामू बोला
हँसमुखजी रामू ने
पैसे उधार लेकर लौटाए नहीं
कहता है जब होंगे तो दे दूंगा ,
अपने वादे से मुकर गया
आप ही फैसला करो
अगर इसे नेता कहा
तो क्या गुनाह किया
हँसमुखजी ने सोचा फिर बोले
क्योंकी रामू
धूर्त.मक्कार भ्रष्ट और दोहरे
चरित्र का नहीं है 
इसलिए इसे नेता कहना
उचित नहीं है
तुमसे पैसे उधार लिए
इमानदारी से मान रहा है
अभी होंगे नहीं
इसलिए लौटा नहीं
पा रहा है
16-12-2011
1867-35-12


Sunday, August 28, 2011

आज का नेता बिन पैंदे का लोटा

पैंदे का लोटा
मुंह पर मुस्कान अन्दर
शैतान
क्या दिल में है कोई
ना जाने
सफ़ेद कपड़ों में भ्रम
फैलाएं 
जनता को बातों से
लुभाए
रोज़ एक नया सपना  
दिखाए
गरीब को और गरीब
बनाए
धर्म ईमान हैं दुश्मन 
इनके
विश्वाश घात है ताकत
इनकी
देश के माल जेब में 
करना खूबी इनकी
चमड़ी इनकी सख्त
और मोटी
किसी बात का कोई
असर नहीं
जूते निरंतर खाते जाते
फिर भी मुस्कराते जाते
आज कहा कल भूल जाते
गिरगिट से ज्यादा
रंग बदलते
इन्हें देख गिरगिट
शरमाते
डाकू लज्जा से सर
झुकाते
इनसे बड़े घाघ नहीं होते
अभिनय में
अमिताभ को हराते  
बस चले तो भगवान्
को ना छोड़े
ऐसे नेता से बच कर
रहना
ज़ल्द से ज़ल्द पीछा
        छुडाना       
28-08-2011
1408-130-08-11