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Wednesday, May 30, 2012

हम खुश किस्मत हैं,हमें गाँधी,सुभाष मिले

हम खुश किस्मत हैं
हमें गाँधी,सुभाष मिले
पटेल,शास्त्री भी मिले
हम आज़ाद भी हुए
हमें गणतंत्र मिला,
प्रजातंत्र भी मिला
फिर इतने बदकिस्मत
कैसे हो गए
भ्रष्ट और स्वार्थी
नेताओं का राज मिला
ऊपर जाऊंगा तब
इश्वर से पूछूंगा ज़रूर
ये अंग्रेजों की
बद्दुआ का असर है
या फिर
हमारे कर्मों का
फल है
30-05-2012
547-67-05-12


Monday, December 26, 2011

व्यथित मन का मित्रों को पत्र

जन्म के साथ ही
आजादी के नाम से
मेरा परिचय हुआ
गाँधी,सुभाष,भगत सिंह
चन्द्र शेखर और देश के लिए
लड़ने वालों को जाना
संस्कारों ,मर्यादाओं
का पालन होते देखा
निस्वार्थ
सार्वजनिक जीवन जीते
नेताओं को देखा
आजादी मिली
हर देशवासी के मन में
उमंग और खुशी थी
अपने देश में
अपनों पर
अपनों का राज देखना
बाकी था
अब तक जो देखा था
उससे पूर्ण
आशा और विश्वास था
अब गरीब गरीब नहीं रहेगा
देश का धन देश में रहेगा
हर देशवासी का जीवन
सुखद होगा
प्यार भाईचारे का वर्चस्व
होगा
आज जन्म के ७० वर्ष बाद
मुझे लगता है
बचपन में जो देखा था
जो सोचा था
वैसा कुछ भी नहीं है
क्या सब भ्रम था ?
क्या अपनों से प्रेम की
आशा करना गलत था ?
क्या अपनों का
अपनों पर राज़ करना
एक दुस्वप्न था ?
अपनों के बीच
खुल कर रो भी नहीं सकता
क्या क्या केवल मैं घुटता हूँ ?
क्या केवल मैं व्यथित हूँ ?
इस प्रश्न का उत्तर खोज
रहा हूँ
मेरे मित्रों से
आग्रह पूर्वक निवेदन करता हूँ
मेरे प्रश्न का उत्तर दें
अगर सहमत हैं ,
तो मुझे बताएं
व्यथा को कम करने के लिए

व्यवस्था को बदलने के लिए
वे क्या कर रहे हैं ?
26-12-2011
1890-58-12

Saturday, December 10, 2011

अब और देरी मत करो


अब और देरी मत करो
समय व्यर्थ ना करो
देश को शर्मिन्दा ना करो
घडियाली आंसू बंद करो
अन्याय करना बंद करो
अपनों को पराया ना कहो
जनता की इच्छा जान लो
जनता की बात मान लो
नाटक करना छोड़ दो
भ्रष्ट तंत्र को ख़त्म करो
गाँधी अन्ना का सम्मान करो
जन लोकपाल क़ानून
पास करो
10-12-2011
1849-17-12