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Friday, July 29, 2011

अब उठ भी जाओ, बैठे ना रहो ,कोई कुछ करेगा ,भूल जाओ

अब उठ भी जाओ

बैठे ना रहो

कोई कुछ करेगा

भूल जाओ

सपने देखना बंद करो

खुद कमान सम्हालो

लोगों को साथ लो

काफिला बनाओ

निरंतर

जो हो रहा देश में हर

शख्श को बताओ

भ्रष्टाचार और घोटाले

उजगार करो

बेईमानों का पर्दाफ़ाश करो

साथ मिल कर लड़ो

देश को भ्रष्टाचार

मुक्त करो

29-07-2011

1260-144 -07-11

Saturday, June 18, 2011

देश सेवा के नाम पर अंतिम क्षण तक तन मन से घोटालों में लिप्त थे

वो अस्सी वर्ष के
मोटी चमड़ी वाले घाघ
नेता थे
बिना पद के थे
अवसाद में सख्त बीमार हुए
मौत के कगार पर पहुंचे
बचाने के सारे जतन
विफल हो गए
परमात्मा भी नहीं पिघले
अंतिम प्रयास में ,
एक अन्य नेता ने
उनके कान में कहा
आपको चुनाव का टिकट
मिल गया
नेताजी ने आँखें खोली
हल्की मुस्कान बिखेरी
थोड़े दिनों में स्वस्थ हो गए
चुनाव लड़े और जीत गए
मंत्री बने,कई घोटाले किये
जनता और कोर्ट के दबाव में
पद मुक्त हुए
परदे के पीछे से चालें
चलने लगे
चालों ने असर दिखाया
राज्य के गवर्नर नियुक्त हुए
राजनीती से बाज़ नहीं आये
रोज़ नए गुल खिलाने लगे
अखबारों की सुर्खी बने रहे
किसी तरह पांच वर्ष हुए
गवर्नरी से भी मुक्त हुए
मरते वक़्त भी
किसी आयोग के चेयरमैन थे
जनता के सच्चे सेवक थे
निरंतर देश सेवा के नाम पर
तन मन से घोटालों में लिप्त थे
नए नेताओं के लिए
प्रेरणा स्त्रोत्र थे
18-06-2011
1066-93-06-11