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Tuesday, October 23, 2012

ये हवा भी ना जाने कितने चेहरे बदलती है



ये हवा भी ना जाने
कितने चेहरे बदलती है
कभी आंधी बन कर
कभी तूफ़ान बन कर
तांडव मचाती है
कभी मंद शीतल
मधुर स्वर लहरी सी
कानों में बंसी बजाती है
मन को प्रफुल्लित करती है
कभी गोरियों के आँचल से
कभी बालों से
अठखेलियाँ करती है
आशिक मिजाजी का
सबूत देती है
कभी सांय सांय की
ध्वनी से
मरघट की याद दिलाती है
पता नहीं कहाँ से आती है
कहाँ जाती है
ये हवा भी ना जाने
कितने चेहरे बदलती है
776-21-23-10-2012
हवा, चेहरे, अठखेलियाँ

Thursday, March 15, 2012

चेहरे

मैंने देखे हैं 
भांती भांती के चेहरे
कुछ अपने में डूबे
दुनिया से बेखबर
फूल से कोमल
कुछ चिंता से ग्रस्त
दुखों के
पहाड़ तले दबे हुए
कुछ ऐसे भी दिखे
जो स्वयं से अधिक
दूसरों के
कार्य कलापों में व्यस्त
चंद चेहरे ऐसे भी दिखे
जो हँस रहे थे
पर हंसी के पीछे मन की
पीड़ा झलक रही थी
कुछ महक रहे थे
सबको लुभा रहे थे
खुशियाँ बाँट रहे थे 
कुछ ज़हर से बुझे हुए
बिल्ली सी आँखें
लोमड़ी सा मष्तिष्क लिए
अपना शिकार दूंढ़ रहे थे
कुछ साधारण से चेहरे
ऐसे भी दिखे जो संतोष से
लबालब भरे हुए थे
तनाव का
नामो निशाँ भी नहीं था
जिज्ञासा से भरे चेहरे भी
दिखे मुझको
हर घटना को आँखें
फाड़ फाड़ कर देख रहे थे 
कुछ थके हुए झुर्रियां से
भरे हुए
मन में  प्रश्न लिए हुए
क्या होगा ?कब होगा
जीवन कब तक चलेगा
इस बात से डरे हुए
कुछ जोश से भरे हुए
आगे बढ़ने की चाहत में
कर्म में जुटे हुए
कुछ अलसाए से आराम से
चाय के ढाबे पर बैठे
बीड़ियाँ फूँक रहे थे
और भी ना जाने
कितनी तरह के चेहरे देखे
जो उनके
जीने सोचने का ढंग
स्पष्ट उजागर कर रहे थे 
जितने भी चेहरे याद रहे
खुल कर बता दिया 
जो भूल गया फिर कभी
बता दूंगा
पर अब जो भी चेहरा
दिखता
उसमें कुछ ना कुछ
ढूंढता हूँ  
15-03-2012
379-113-03-12

Saturday, October 15, 2011

चेहरे पर चेहरे चढ़ा कर घूमते हैं चेहरे


चेहरे पर चेहरे 
चढ़ा कर घूमते हैं चेहरे
वक़्त,जरूरत के साथ

बदलते हैं चेहरे
हर चेहरे के अनेकानेक
चेहरे
एक खुद के लिए
एक परिवार के लिए
दोस्त,रिश्तेदारों के लिए
फर्क होते हैं चेहरे
निरंतर
मिजाज़ बदलते हैं चेहरे
अनजान के लिए
सबसे बेहतर दिखते हैं
चेहरे
सच ईमान की मूर्ती
नज़र आते हैं चेहरे
चिकनी चुपड़ी बातों से
भरे होते हैं चेहरे
कौन सा असली ?
कौन सा नकली ?
पहचान में
आते नहीं चेहरे

किसी को नहीं बख्शते
चेहरे पर चेहरे
निरंतर
लुभाते भरमाते हैं
चेहरे
14-10-2011
1649-57-10-11

Monday, September 5, 2011

दर्द दिल की गहराइयों में छुप गए

गहराइयों में छुप गए
मन में तन्हाइयों के
घरोंदे बन गए
लोगों के सवालों से
बचने के लिए
हकीकत छुपाने लिए
चेहरे पर चेहरा
लगा कर रखता हूँ
खूब हंसता हूँ
खूब बोलता हूँ
मन ही मन
निरंतर रोता हूँ
चुपचाप सहता हूँ
05-09-2011
1445-19-09-11

Thursday, August 25, 2011

चेहरे पर चढ़ा चेहरा नज़र आ गया

बम की अफवाह से
सन्नाटा छा गया
हर मुसकाराता चेहरा
ज़र्द हो गया  
दहशत में  घबरा गया

जहन का शोर बढ़ गया 
अब क्या होगा ?
कौन शिकार होगा ?
कौन बचेगा ?
सवालों में उलझ गया
मैं बच जाऊं
मुझे कुछ ना हो 
परमात्मा से प्रार्थना में
डूब गया
निरंतर साथ
जीने मरने की कसमें
खाने वाले  के
चेहरे पर चढ़ा चेहरा
नज़र आ गया
25-08-2011
1392-114-08-11