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Monday, April 2, 2012

नसीब की क़यामत


नसीब  की
क़यामत तो देखिये
हाथों की मेहंदी को
आँखों के अश्कों ने
धो दिया
चूड़ियों की खनक को
सिसकियों ने दबा दिया
अरमानों ने
कफ़न ओढ़ लिया
लाल चुनडी की जगह
सफ़ेद साड़ी नी ले ली
ना जाने खुदा ने
उससे किस गुनाह का
बदला लिया
  
02-04-2012
422-02-04-12

Saturday, March 17, 2012

मेरा नसीब कहता है


मेरे हाथों की लकीरों में
हर तरफ
तेरा नाम लिखा है
फिर तूँ मेरे साथ
क्यूं नहीं है
या तो लकीरों का
इम्तहान ले रही है
या फिर खुद के हाथ से
 मेरा नाम मिटा
रही है
17-03-2012
389-123-03-12

Friday, August 19, 2011

अब मुस्काराना भी मुमकिन ना रहा

कहाँ तो सोचा था
हंसने का
वक़्त आ गया 
अब मुस्काराना भी
मुमकिन ना रहा
मेरा नसीब मुझसे
रूठ गया
हँसने की सोचूँ ?
या उसे मनाऊँ ?
किनारे
पहुँचने से पहले

निरंतर नैया
यूँ ही डगमगाती
मंजिल से दूर
रह जाती
19-08-2011
1382-104-08-11