निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
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Monday, April 2, 2012
Saturday, March 17, 2012
मेरा नसीब कहता है
मेरे हाथों की लकीरों में
हर तरफ
तेरा नाम लिखा है
फिर तूँ मेरे साथ
क्यूं नहीं है
या तो लकीरों का
इम्तहान ले रही है
या फिर खुद के हाथ से
मेरा नाम मिटा
रही है
17-03-2012
389-123-03-12
Friday, August 19, 2011
अब मुस्काराना भी मुमकिन ना रहा
कहाँ तो सोचा था
हंसने का
वक़्त आ गया
अब मुस्काराना भी
मुमकिन ना रहा
मेरा नसीब मुझसे
रूठ गया
हँसने की सोचूँ ?
वक़्त आ गया
अब मुस्काराना भी
मुमकिन ना रहा
मेरा नसीब मुझसे
रूठ गया
हँसने की सोचूँ ?
या उसे मनाऊँ ?
किनारे
किनारे
पहुँचने से पहले
निरंतर नैया
यूँ ही डगमगाती
मंजिल से दूर
निरंतर नैया
यूँ ही डगमगाती
मंजिल से दूर
रह जाती
19-08-2011
1382-104-08-11
1382-104-08-11
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