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Saturday, December 8, 2012

पीढी अंतराल



जब मेरे दादा ने
कुछ कहा
मैं बोला दादाजी
ज़माना बदल गया है
आप जो कहते हो
अब वैसा नहीं होता है
जब मेरे बेटे ने मुझसे
यही कहा
मैं नाराज़ हो गया
तुम मुझसे
ज्यादा समझते हो ?
कह कर कमरे से
निकल गया
पीढी अंतराल को 
साफ़ नकार गया
922-40-08-12-2012
पीढी अंतराल 

Tuesday, November 6, 2012

अब भी कुछ युवा संस्कारों में जीते हैं(काव्यात्मक लघु कथा )



बूढ़े बाबा ने दरवाजा खोला
मुझे देखते ही कहने लगे
बेटा तो घर पर नहीं है
किससे मिलना है
मैं बोला बाबा आपसे
बाबा चौंक कर कहने लगे
बेटा सांस लेना पेट
भरना भी दूसरों पर निर्भर है
तो मुझसे मिलने कोई
क्यों आयेगा
किसी को मुझसे कोई काम नहीं
तो फिर मेरी परवाह
क्यों करेगा
वैसे भी आजकल
बिना काम कोई किसी से
नहीं मिलना चाहता
बिना काम मिलना
समय व्यर्थ करने जैसा लगता
तुम अपवाद लगते हो
ज़माने की
चाल नहीं चलते हो
मैं बोला
बाबा इस ज़माने में भी
सारे युवा
पथ से भटके हुए नहीं हैं
अब भी कुछ
युवा संस्कारों में जीते हैं
बच्चे से बूढों तक
सब का ध्यान रखते हैं
823-07-06-11-2012
बुढापा,युवा,संस्कार,पीढी अंतराल

Saturday, September 1, 2012

हम तो गुजर जायेंगे



हम तो गुजर जायेंगे
याद करोगे वो बातें
जो कह कर जायेंगे
जब भी परेशान हो कर
खड़े होगे चौराहे पर
रास्ता पूछोगे
जब मिलेगा नहीं
कोई भी बताने वाला
आसूं बहाओगे
हम याद आयेंगे
खुदा से दुआएं करोगे
एक बार हमें ज़मीन पर
भेज दो
फिर कभी लौट कर
जाने ना देंगे
इज्ज़त मोहब्बत से
अपने पास रखेंगे
जो गलती पहले करी
फिर ना दोहराएंगे
01-09-2012
708-04-09-12