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Tuesday, March 6, 2012

उनसे ज्यादा हम परेशाँ हैं

कोई बता दे
वो परेशाँ क्यूं हैं ?
कौन सा गम उन्हें
रुलाता है ?
उनके चेहरे का नूर
छुपाता है
हम यूँ ही वजह
जानना नहीं चाहते
उनकी परेशानी से
हम भी बेहाल है
जब उन्हें सुकून नहीं
हमें सुकून कैसे होगा
उनसे ज्यादा हम
परेशाँ हैं
06-03-2012
308-42-03-12

Wednesday, October 12, 2011

अब नींद कहाँ आती



उनकी याद में
अब नींद कहाँ आती
पलकें थक कर
खुद-ब-खुद बंद
हो जाती हैं
मन की चीखें सोने
नहीं  देती हैं
कानों में
उनकी आवाज़
निरंतर गूंजती
दिल को बेहाल करती
अब ठंडी हवा भी
दिल की आग ठंडी
नहीं करती
उम्र अब बेबसी में
कटती
12-10-2011
1638-46-10-11