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Sunday, March 18, 2012

यह कैसी परीक्षा है ?


यह कैसी परीक्षा है
जिस में शिष्य
परीक्षक
गुरु परीक्षार्थी है
अनुभव की प्रतिष्ठा
दांव पर है
जिसने सिखाया वो
अब गौण
जिसने सीखा वो
महान है
समय की यह कैसी
चाल है
बाप बेटा बराबर हैं
उम्र में अंतर व्यर्थ है
बड़ों को सम्मान
दूर की बात
स्वार्थ सर्वोच्च है
मैं और मेरा
सब से 
महत्त्वपूर्ण है
18-03-2012
401-135-03-12

Tuesday, April 12, 2011

मतभेद रखो,मनभेद मत रखो

गुरु,शिष्य
दोनों राजनीति में थे
विचारों में
मतभेद बढ़ता गया
शिष्य,शिष्टता की सीमाएं
लांघता गया
गुरु के लिए निरंतर
अनर्गल बातें कहने लगा
विचारों में मतभेद को
दुश्मनी समझने लगा
मिलना जुलना बंद
कर दिया
शिष्य का परिवार
दुर्घटना का शिकार हुआ
शिष्य विदेश में था
गुरु को पता चला
फ़ौरन स्थल पर पहुँच
परिवार को अस्पताल
पहुंचाया
जब तक शिष्य विदेश से
नहीं लौटा
जी जान से सेवा
करता रहा
शिष्य को आते ही सब
पता चला
ग्लानि से भर गया
गुरु से मिलते ही रोने लगा
परिवार की जान
बचाने के लिए
धन्यवाद देने लगा
गुरु ने आशीर्वाद दिया
और कहा मतभेद रखो
मनभेद मत रखो
शिष्टता कभी ना भूलो
सुबह का भूला
शाम को भी लौट आये तो
भूला नहीं कहलाता
12-04-2011
656-89-04-11